
*छह गोलियां खायीं, जिस्म में मौजूद हैं 9 स्पिल्टिंर, उनके नाम से खौफ खाते हैं नक्सली* जिदन को मार गिराने वाली टीम की कर रहे थे अगुवाई, कामिक्स में बच्चे पढ़ते हैं इनकी जांबाजी के किस्से झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की लड़ाई जारी है. लाल आतंक के खात्मे को लेकर दिन-रात सुरक्षाबल बीहड़ों में घूमते रहते हैं जहां सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ आम है. कभी नक्सली मारे जाते हैं तो कभी जवान शहीद होते हैं. इसके बीच एक ऐसा अधिकारी है, जिनके नाम से नक्सली खौफ खाते हैं. प्रकाश रंजन मिश्रा. उन्हें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहा जाता है. अभी नक्सल प्रभावित जिला खूंटी में सीआरपीएफ 94 में सेकेंड इन कमांड के पद पर तैनात हैं. सोमवार को (21 दिसंबर) जीतन गुड़िया के साथ हुए मुठभेड़ में पुलिस दल का नेतृत्व यही कर रहे थे. *मिला चुका है छह बार राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार, फिर नामित* खास बात यह है कि नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए ज्यादातर ऑपरेशनों की कमान इन्होंने खुद संभाली है. रणनीति भी खुद तैयार करते हैं. वह कहते हैं कि मरना तो सभी को एक दिन है, फिर डरना क्यों. देश के लिए मर मिटने का जज्बा हर किसी में होना चाहिए. पीआर मिश्रा की बहादुरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें छह बार राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार मिल चुका है. खूंटी का एडिशनल एसपी रहते हुए सातवीं बार वीरता के पुलिस पदक से सम्मानित किया गया हैं. देश के सुरक्षा बलों के इतिहास में किसी एक अधिकारी को मिलने वाले वीरता के सर्वाधिक पुलिस पदक हैं. *पुलिसकर्मियों के लिए हैं प्रेरणास्रोत* पीआर मिश्रा बेहद सतर्कता, चतुराई और कुशलता से अपनी टीम का नेतृत्व करते हैं. मोर्चा लेते समय उनकी बहादुरी और सूझबूझ दुश्मनों पर भारी पड़ जाती है. झारखण्ड और छतीसगढ़ में तैनात हर सुरक्षाकर्मी, जो नक्सल मोर्चे पर डटा हुआ है पीआर मिश्रा को प्रेरणास्रोत मानता है और उनकी बहादुरी को सलाम करता है. *खूंटी में एएसपी भी रह चुके हैं* इससे पहले प्रकाश रंजन असम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर और ओडिशा जैसे राज्यों में अपनी सेवा दे चुके हैं. कोबरा बटालियन में भी इन्होंने चार साल तक काम किया है और खूंटी में एएसपी के पद पर भी रह चुके हैं. *कंधे में लगी हैं चार गोलियां* 18 सितंबर 2012 को झारखंड के चतरा जिले के राबदा गांव में सीआरपीएफ और माओवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ में प्रकाश रंजन मिश्रा को 6 गोलियां लगीं. एक गोली बायीं जांघ में लगी, एक गोली कान के पास सिर की खाल को छीलती हुई निकल गई. वहीं चार गोलियां उनके दाहिने कंधे और छाती के बीच लगी. इस कदर घायल होने के बावजूद बहादुरी के साथ अपनी पार्टी की कमान संभालते रहे और नक्सलियों को उन्हीं के ठिकाने में घुसकर शिकस्त दी. उनके जिस्म में 9 स्पिल्टिंर लगे हैं. *घायल साथी को जान पर खेलकर बचाया था* प्रकाश रंजन मिश्रा की बहादुरी के तो कई किस्से हैं. खूंटी जिले में एएसपी के पद पर रहते हुए नक्सलियों से कई बार मुठभेड़ हुई. खूंटी के बाँदु में एक बार पुलिस और नक्सलियों में मुठभेड़ हो रही थीं तभी एक जवान घायल हो गया और भीषण मुठभेड़ के दौरान पीआर मिश्रा ने घायल जवान को जान पर खेल कर निकाला था. *असम व त्रिपुरा में भी दे चुके हैं सेवा* प्रकाश रंजन मिश्रा की पोस्टिंग देश के सबसे ज्यादा संवेदनशील और नक्सल प्रभावित खूंटी जिले में है. असम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर और ओडिसा के बाद उनकी पोस्टिंग झारखंड में हुई और छतीसगढ़ जिसके बाद उन्हें फिर से झारखण्ड के खूंटी जिले में भेज दिया गया. CRPF के कोबरा बटालियन में भी इन्होंने चार साल तक काम किया है. *कामिक्स में बच्चे पढ़ते हैं जांबाजी के किस्से* प्रकाश रंजन मिश्रा की जाबांजी के किस्सों को बच्चे कॉमिक्स में पढ़ते हैं. इनमें नक्सलियों से मुठभेड़ की कहानी भी है. रियल हीरो पर CRPF ने ‘शूरवीर प्रकाश’ नाम से ई-कॉमिक्स जारी किया है. प्रकाश रंजन मिश्रा को छह बार राष्ट्रपति पदक और एक बार शौर्य चक्र से नवाजे गये हैं। *317 नक्सलियों व उग्रवादियों को कर चुके हैं गिरफ्तार* पीआर मिश्रा अब तक द्वारा 317 नक्सलियों और उग्रवादियों की गिरफ्तारी कर चुके हैं. इसके इंसास, एके 47 जैसे 116 हथियारों की बरामदगी पीआर मिश्रा ने खूंटी जिले में एएसपी रहते हुए कर चुके हैं. रात हो दिन इसकी परवाह ना करते हुए हर विषम परिस्थितियों मं संयमित रहकर काम करने वाले ऑफिसरों में से पीआर मिश्रा का नाम दर्ज है.