कोरोना महामारी की तस्वीर भयावह है ,,,
दुनिया में 32 लाख + केस
2 लाख 30 हजार मौत
पर खास बात यह कि 10 लाख लोगों ने दुनियाभर में जिंदगी की जंग जीत भी ली ,,,
ये 10 लाख ही मानव की जीवटता के प्रतीक हैं, जीवनशक्ति के प्रतिबिंब हैं। ये सभी वे लोग हैं जिन्होंने उन कोरोना वीरों के महान कृत्य को सलाम किया, जिन्होंने उनका जीवन बचाया । ठीक हुए ये 10 लाख लोग कोरोना वारियर्स के सीने पर लटका एक तमगा हैं । ये ठीक हुए लोग धरती का सम्बल हैं, मानवीय जिजीविषा के हस्ताक्षर हैं ।
गौर कीजिए, डॉक्टरों के जिन हाथों और श्रम के पसीने ने 32 लाख में से 10 लाख को स्वस्थ कर दिया, वे क्या नहीं कर सकते । फिर सिद्ध हुआ कि मारने वाले से बचाने वाला बड़ा है । सिद्ध हुआ कि मौत बेशक कितनी जिद्दी हो, आदमी रिश्ते में उसका बाप है । सिद्ध हुआ कि हर जालिम एक दिन हारेगा । तय हुआ कि प्रत्येक अंधेरा मिट जाएगा । बस छाती ठोककर एक बार खड़ा तो हो जाए आदमी !
किसी भी युग का इतिहास उठाकर देख लीजिए । जब निकली होगी, घोर निराशा से ही खुशी की किरण निकली होगी । रात होगी तभी तो सुबह होगी । दूर क्यों जाएं, हाल की याद कर लें ।
परेशानी सिर्फ लम्बे रास्तों की है । मनुष्य को पगडंडियों की तलाश है । एक भी शॉर्टकट मिला नहीं कि कोरोना संसार से मरा नहीं । कोरोना को मनुष्य जाति शाप दे चुकी है । कोरोना का बाप चीन भी सारे संसार द्वारा शापित हो चुका है । मानव के श्रम ने यदि 32 लाख में से 10 लाख को जीवन लौटाया है तो बाकी को भी मिलेगा । कोरोना का विश्वभर में ग्रास बन चुके करीब सवा दो लाख निर्दोषों की आहें बेकार नहीं जाएंगी ।
तमाम दुनिया के साथ इस महायुद्ध में भारत भी शामिल है । हमने भी 9 हजार रोगियों को कोरोनामुक्त कर दिखाया है । देश में जितनी भी समस्याएं कोरोना के कारण आई , उनका निराकरण जारी है । अब तक कहा जा रहा था कि जो जहां है , वहीं रहे । अब दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों और छात्रों को राज्य में वापस लाने का काम सभी राज्यों ने शुरू कर दिया है । यह अच्छी शुरुआत है , यद्यपि बेहद श्रमसाध्य है । केरल और गुजरात तक से मजदूर उत्तर भारत लाने पड़ रहे हैं । इतना ही नहीं , लाते ही उन्हें क्वारेन्टीन करने के महाप्रबन्ध भी बड़े स्तर पर शुरू हो गए हैं ।
लड़ाई बड़ी है तो काम भी बड़े , समस्याएं भी बड़ी और खर्च भी बड़े । सारे संसार में नई तरह की समस्याएं आ खड़ी हुई हैं । कुछ हो गई , बाक़ी होने वाली हैं । इनसे हमें ही नहीं दुनियाभर को निपटना पड़ेगा । याद रखिये कोरोना की तरह संकट की ये घड़ियाँ भी बुरे वक्त और बुरी यादों की तरह बीत जाएंगी । माना कि कोरोना से लड़ाई लम्बी है । पर लड़ाई लिखी है तो कहीं न कहीं इसका अंत भी लिखा होगा