जीवन में स्थिरता सहजता और सरलता लाने के लिए परमात्मा से नाता जोड़े- सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज

73 वें निरंकारी संत समागम का सफलतापूर्वक समापन।

जीवन में स्थिरता सहजता और सरलता लाने के लिए परमात्मा से नाता जोड़े- सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज

एटा- जीवन में स्थिरता, सहजता और सरलता लाने के लिए परमात्मा से नाता नाता जोड़े। यह विचार सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने मानवता को प्रेषित करते हुए तीन दिवसीय वर्चुअल निरंकारी संत समागम में व्यक्त किए सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने कहा कि जीवन में हर पहलू में एकता की आवश्यकता है। परमात्मा स्थिर एवं शाश्वत एक रस है। जब हम अपना मन इसके साथ जोड़ देते हैं तो मन में भी ठहराव आ जाता है। जिससे हमारी विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता बढ़ जाती हैऔर जीवन के हर उतार-चढ़ाव का सामना हम उचित तरीके से कर पाते हैं। स्थिरता का भाव समझाते हुए सतगुरु माता जी ने कहा कि संसार परिवर्तनशील है। इसमें तो उथल-पुथल होती ही रहती है। परिस्थितियां कभी अनुकूल तो कभी प्रतिकूल होती हैं। कई बार हमारी अपनी सोच हमें कहीं एक दिशा में ले जाती है तो कहीं दूसरी ओर इससे कभी हम बहुत खुश तो कभी इतने निराश हो जाते हैं।तो कभी एकदम तनावग्रस्त हो जाते हैं। जीवन के उतार-चढ़ाव में संतुलन बनाकर चलने से हमें स्थिरता प्राप्त हो सकती है। और यह केवल तभी संभव है यदि हम आध्यात्मिक जागृति प्राप्त कर चुके संतो का संग करते हैं। समागम के दूसरे दिन का आरंभ रंगारंग सेवा दल रैली से हुआ। जिसमें देश विदेश के सेवादल भाई बहनों द्वारा प्रार्थना, शारीरिक व्यायाम, खेलकूद तथा विभिन्न भाषाओं के द्वारा मिशन की मूल शिक्षाओं को दर्शाया गया। सेवा में समर्पित रहने वाले सभी संतो को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हुए सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने कहा कि कोरोना के कारण जीवन में कितनी सारी परेशानियां एवं समस्याओं के आने के बावजूद जिनका भी मन स्थिर था एवं जिन्होंने सेवा से अपने मन को जोड़े रखा उसके जीवन में सहजता और स्थिरता कायम रही। इस वर्ष की विपरीत परिस्थितियों में भी बहुत से लोगों की जीवन शैली बदल गई। लेकिन सेवादारों के द्वारा इस परिस्थिति में भी सेवा का वही जज्बा कायम रहा। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने वचनों के माध्यम से मानवता के नाम संदेश देते हुए कहा- जब हमारा मन परमात्मा की पहचान कर, इसका आधार लेता है। तब हम परमात्मा के अंश बन जाते हैं। जीवन में स्थिरता आ जाती है यदि हम यह सोचे कि बाहर का वातावरण हमारे अनुकूल हो जाने से जीवन में स्थिरता आएगी तो यह संभव नहीं। स्थिरता तो अंतर्मन की अवस्था पर निर्भर है। अंतर्मन को परमात्मा से जोड़कर स्थिरता प्राप्त की जा सकती है। फिर किसी भी प्रकार की परिस्थिति हमारे मन का संतुलन नहीं बिगाड़ सकती। क्योंकि हम अंदर से मजबूत है ऐसे बाहरी वातावरण हमारे मन को विचलित नहीं कर सकता। सद्गुरु माता ने उदाहरण देते हुए कहा- कि एक सागर का स्वरूप इतना गहरा, बड़ा और विशाल होता है। उसके बावजूद भी उसकी गहराई मैं कोई हलचल महसूस नहीं होती। लेकिन जब हम उसके किनारे की ओर आते हैं तो उसकी गहराई कम हो रही होती है। उसमें लहरें भी आती हैं और उछाल भी आते हैं और शोर भी सुनाई देने लगता है। इसी भांति मानव जो सहनशील होता है विषम परिस्थिति में प्रभु निरंकार के साथ जुड़ कर उसकी स्थिरता कायम रहती है। इसके विपरीत जो इंसान छोटी-छोटी बातों का असर ग्रहण करता है उसके व्यवहार से ही पता चल जाता है वह स्थिर नहीं है। परमात्मा की प्राप्ति ही मानव मन में लाती है स्थिरता। कोविड-19 के दौरान सरकार द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों को अपनाते हुए मानव कल्याण के लिए निरंकारी मिशन ने अपना भरपूर योगदान दिया। जहां भी जरूरत महसूस हुई चाहे वह मोहल्ला, बस्तियां, गांव व शहर हो वहां जाकर राशन एवं जरूरतमंद वस्तुओं को वितरण किया गया। मिशन के कई भवन कोरोना सेंटर के रूप में भी प्रयोग किए गए। जब लॉकडाउन में कुछ शिथिलता आई तो कोरोना के कारण हुई रक्त की कमी को पूरा करने के लिए मिशन की ओर से समय-समय पर रक्तदान शिविर भी लगाए गए। साथ ही निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी महाराज के संदेश को भी दोहराया गया- मानव को हो मानव प्यारा एक दूजे का बने सहारा। समागम के समापन दिवस पर एक बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें विश्व भर के 21 कवियों ने *स्थिरता से नाता जोड़ के मन का, जीवन को हम से सहज बनाएं* इस शीर्षक पर विभिन्न बहू वासी कवियों का सभी ने आनंद लिया। जिसमें हिंदी अंग्रेजी पंजाबी, मराठी, उर्दू इत्यादि भाषाओं का समावेश देखने को मिला। समागम के तीनों दिन भारतवर्ष के अतिरिक्त दूर देशों से भी वक्ताओं ने विभिन्न भाषाओं का सहारा लेते हुए जहां अपने प्रेरणादाई विचार प्रस्तुत किए। वही संपूर्ण अवतार वाणी, तथा संपूर्ण हरदेव वाणी के पावन शब्द पुरातन संतो के भजन और गीत कारों की प्रेरणादायक मधुर रचनाओं ने भक्तों को मंत्र मुक्त कर दिया। जिसमे जोन आगरा के गीतकारो ने भाग लिया।

अपने घरों में बैठकर वर्चुअल रूप में लाखों श्रद्धालुओं ने 73वें निरंकारी संत समागम का आनंद प्राप्त किया जिसमें में आगरा जॉन ब्रांच एटा ने भी तीन दिवसीय निरंकारी संत समागम का आनंद प्राप्त किया।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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