किसान आंदोलन वालों ने पहली गलती तो ये की कि अपने बीच खालिस्तानियों को घुसा लिया ।
उनकी Funding स्वीकार की ।
उनको मोदी तेरी कब्र खुदेगी जैसे नारे लगाने दिए ।

दूसरी गलती ये की कि टुक टुक गैंग , डफली वाले , शाहीन बाग वाली दादी को घुसा लिया ।
उसके बाद तीसरी गलती ये की कि योगराज सिंह जैसे लोगों को घुसने दिया । न सिर्फ घुसने दिया बल्कि उसको बाकायदे मंच दिया ।
फिर जब वो मंच से हिन्दू बहन बेटियों के खिलाफ जहर उगल रहा था तो उसे रोका नही बल्कि तालियां बजाने लगे ।
किसान आंदोलन में ये हिन्दू विरोधी बातें क्यों होने लगीं ।
मोदी की कब्र क्यों खोदी जाने लगी ????
अब किसान आंदोलन ये चौथी गलती करने जा रहा है …… 8 दिसंबर के भारत बंद को ये जो विपक्षी पार्टियों ने समर्थन दिया है …… ये समर्थन इस किसान आंदोलन को पूरी तरह Discredit कर देगा ।
आपने डिस्कवरी चैनल पे वो बूढ़े मरणासन्न शेरों को देखा होगा ……. अपने अंतिम दिनों में वो बेचारे अशक्त हो मरे हुए जानवरों की सूखी हड्डियां चाटने को मजबूर हो जाते हैं । भाजपा / मोदी ने देश मे विपक्ष का वही हाल कर दिया है । एक एक कर सारे किले ढह गये हैं । आज विपक्षी खेमे जो हताशा निराशा है उसे शब्दों में बयाँ नही किया जा सकता । सिर्फ Congress ही नही बल्कि एक एक कर सभी क्षेत्रीय दल भी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं ।
विपक्ष का मनोबल तोड़ने वाली सबसे बड़ी घटना वो रही जब सपा बसपा मिल के भी 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को नही रोक पायीं ।
उसके बाद बिहार विजय जहां NDA ने 15 साल की Anti Incumbency के बावजूद जीत हासिल की ।
Latest घटना है भाग्यनगर के किले में प्रवेश …….. 4 seat से सीधे 48 सीट …… और सिर्फ Seat नही , बल्कि 36% भोट शेयर ……. भाग्य नगर ने विपक्ष को हिला दिया है …… इन्होंने देख समझ लिया है कि भाजपा के विजय रथ को रोकना असंभव है ……. बंगाल के बाद अब तेलंगाना और आंध्र की बारी है ……..
ये किसान आंदोलन इसी हताशा की उपज है ।
विपक्ष अब सड़कों पे अराजकता फैला के मोदी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है ।
इसीलिए हम इस किसान आन्दोलन को शाहीन बाग 2 बोलते हैं ।