सात से चौदह दिसम्बर तक मनाया जाऐगा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सप्ताह – सीएमओ

सात से चौदह दिसम्बर तक मनाया जाऐगा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सप्ताह – सीएमओ ———————————————————-

-प्रत्येक ब्लॉक को 100 फॉर्म भरवाए जाने का लक्ष्य निर्धारित

एटा ! जिले में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को गति प्रदान करने व अधिक से अधिक लाभार्थियों को लाभ प्रदान करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सप्ताह प्रारंभ किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अरविन्द कुमार गर्ग ने उक्त योजना के अन्तर्गत आयोजित की गई प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की समीक्षा बैठक में  फॉर्म फीडिंग व पेंडेंसीज को देखते हुए सात दिसंबर से चौदह दिसंबर तक विशेष सप्ताह मनाए जाने का निर्णय लिऐ जाने के बाद स्वराज्य टाइम्स को बताया कि जिले में अब तक 27638 लाभार्थियों के रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। जो कि कुल वार्षिक लक्ष्य का लगभग 69 प्रतिशत है।लक्ष्य प्राप्ति व योजना का लाभ अधिक से अधिक गर्भवती महिलाओं तक पहुंचाने के उद्देश्य से विशेष सप्ताह मनाए जाने का निर्णय लिया गया है।इसके लिए सभी बीसीपीएम को निर्देशित किया गया है कि वह अपने क्षेत्र की आशाओं से संपर्क कर उनके द्वारा फॉर्म फीडिंग कराया जाना सुनिश्चित करें।सप्ताह के दौरान प्रत्येक ब्लॉक को प्रतिदिन 100 नए फार्म पंजीकृत सुनिश्चित कराए जाने का लक्ष्य भी दिया गया है। जिससे सप्ताह के उद्देश्य को पूर्ण किया जा सके। योजना के नोडल अधिकारी डा. बी. डी. भिरौरिया उपमुख्यचिकित्साधिकारी
ने बताया कि योजना का लाभ लेने हेतु प्रथम बार गर्भधारण करने वाली पात्र महिला लाभार्थी राज्य स्तर से जारी हेल्पलाइन नंबर 7998799804 पर कॉल करके,क्षेत्रीय आशा कार्यकर्ता अथवा एएनएम की मदद ले सकती हैं।उन्होंने बताया कि योजना के तहत प्रथम बार गर्भवती होने वाली महिलाओं को उनके खाते में 5000 रुपए तीन किस्तों में दिए जाते हैं।प्रथम किस्त गर्भधारण करने के बाद जल्द से जल्द योजना का फार्म भरने व रजिस्ट्रेशन होने के उपरांत 1 हजार रुपए, दूसरी किस्त प्रसव पूर्व जांच हो जाने पर 2000 रुपए एवं तीसरी किस्त प्रसव के बाद बच्चे के सभी टीके लग जाने के उपरांत 2000 रुपए दिए जाते हैं। ब्लॉक सकीट से लाभार्थी प्रीती ने बताया कि यह योजना काफी अच्छी है। योजना के तहत उन्हें बेहतर सुविधाएं प्राप्त हुईं।  पूजा देवी ने कहा कि आज उनका बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है सुरक्षित है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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