आखिर एटा जेल के बन्दियो की जिम्मेदारी कौन लेगा

*आखिर एटा जेल के बन्दियो की जिम्मेदारी कौन लेगा*

एटा,जैसा कि पुरी दुनिया मे कोरोना माहमारी ने अपने दायरे को असिमित किया है,उससे तो यु लगता है कि शायद पाताल भी अनछुआ ना रहे!क्युकि इस बीमारी ने अपने चेहरे को तो दिखा दिया है लेकिन किस रुप में .कहा से आया हु..अभी यह एक रहस्य ही बना हुआ है, इन्ही कुछ सबालो के जवाव ना मिलने की वजह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा देश को बन्दी के दौर मे ले जाना पड़ा, जिससे यह साबित भी होता है कि देश एक कुशल राजा के हाथों में सुरक्षित है, लेकिन एक बहुत बड़ी संख्या एक ही स्थान पर हो ओर दायरा भी उस संख्या का सिमित हो,तब यह माहमारी किसी भी रुप मे अगर इस स्थान पर प्रवेश कर गयी तब प्रशासन को इस मुस्किल के दौर मे सिर पकड़ने के सिवा कुछ नही सुझेगा,

हा हम एटा जेल के बन्दियो की बात कर रहे हैं क्युकि प्रदेश की कइ जेलो की सुरक्षा के प्रति उन जेलो के प्रशासन ने समय रहते कदम उठा लिये है, जिससे वहा की जेले अब सुरक्षित जोन मे है,

अगर जिला मुरादाबाद के जेल प्रशासन ने समय पर कदम ना उठाये होते तो…….. तो जेल की दुर्दशा शायद इतिहास बन जाती ओर बहुत से बेगुनाह इन्सान मौत के मुह मे समा गये होते क्युकि मुरादाबाद जेल के पत्र से तो यही प्रतित होता है जिसका जिक्र अलीगढ जेल प्रशासन ने अपने पत्र का माध्यम बनाया है उस पत्र मे साफ़ -साफ़ शब्दो मे लिखा गया है कि किस तरह से कइ अपराधो मे निरुद्ध बन्दियो को समय पर कोरोना टेस्ट कराने से उस जेल को बचा लिया गया क्युकि 17बन्दियो मे से करीब 6बन्दियो को कोरोना टेस्ट मे संक्रमित पाया गया था,

*एटा प्राशासनिक अधिकारीयो को जेल के बन्दियो पर रहम खाना चाहिये*

अगर किसी अपराध मे पकड़े गये बन्दी का जैसे मैडीकल कराया जाता है उसी भान्ति कोरोना टेस्ट भी होने पर ही जेल मे प्रवेश किया जाये,तब तक बन्दी को थाने मे या उचित स्थान हो रखा जाये तब शायद एटा जेल सुरक्षित रह सके|

*जेल दायरा -14.25*

*बन्दियो के रखने का दायरा-607*

*इस समय निरुद्ध बन्दी करीब-1050*

सोचिये किस दायरे मे सामाजिक दुरी बना कर यह बन्दी रह रहे होगे व किस तरह से जेल प्रशासन इन बन्दियो को सुरक्षा दे पा रहा होगा,लेकिन अभी तक एटा जेल सुरक्षित हाथो मे है

*प्रदेश की जेलो से संबधित यह पत्र बहुत कुछ बोल रहे हैं*

एटा प्राशासनिक अधिकारीयो को जब से सिर्फ़ तीन कोरोना मरीज मिले है ओर मरीज ना होने की वजह से इतनी ख़ुशी होना लाजिमी हो गया है कि कुछ पहलुओ पर ध्यान देना ही छोड़ दिया है,अगर यही आलम रहा तो किस रास्ते से यह बीमारी जिले मे प्रवेश कर जाये कुछ कहा नही जा सकता है क्युकि कुछ-कुछ शहर के हालात यही दिखाइ दे रहे हैं!

*अगर जेलो को सुरक्षित कर दे तो एटा मीडिया को भी सुचना दे,क्युकि यह मुद्दा सिर्फ़ कोरोना जंग का नही है, उन सभी बन्दियो का है जो सिर्फ़ चारदिवारी मे बन्द बेबस होकर बच नही सकते है,*

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