कोराना युध्द समापन की ओर? श्रेय लेने की हनक में लोग परहेज भूले तो ये हालात साल भर रहेंगे

कोराना युध्द समापन की ओर? ——
श्रेय लेने की हनक में लोग
परहेज भूले तो ये हालात साल भर रहेंगे
–शंकर देव तिवारी
दिल्ली के मुख्य मंत्री प्लाज्मा दान की अपील राष्ट्र हित में करने की कर रहे हैं तो वहीं प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पंचायती राज दिवस को मनाते हुए कह रहे हैं गांव ने सिखाया दो गज दूर रहना तो पुलिस ने सिखाया कर्तव्य परायणता ।
अर्थात उत्साह की कमी किसी भी ओर नहीं दिख रही है । कोराना मेला समाप्ति की ओर जाता दिख रहा है । हमारे यहां लगने वाले मेला के समापन से पूर्व जैसे आयोजन के बाद जाते खेल तमाशों व दुकानदारों से स्थानीय टेक्स वसूल करने वाले गिरोह सक्रिय होने लगते हैं वैसे ही आन कमी मेख निकालने बाले अपनी भूमिका बनाते दिख रहे हैं ।
आगरा में जहां कोरोना को आगरा में प्रवेश के समय एक अच्छे कवच का सामना करना पड़ा । मगर जैसे जैसे विश्व में स्थित बिगड़ी वैसे वैसे अच्छा बचाव देकर आगरा की हालत राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते रसातल की ओर बढ़ता गया । एक और निजामुद्दीन से रिसे जमाती आगरा में समा गए । वैसे ही आगरा मॉडल देने वाले अधिकारियों पर राजनीतिक दवाब बढ़ता गया । जिसका उदाहरण 7 अप्रैल को मथुरा गया मरीज कोरोना का मिला वैसे ही जो कार्रवाई दर्शाई गई हकीकत के जामा पहनने से वंचित की जाने लगी । इसके चलते संक्रमण पहले जमातियोंका आगरा में तथा आगरा से बाहर 11 जिलों में फैलने का कारक पारस आस्पताल फर्जी कार्रवाई की आड़ में संचालित रहा । वाह वाही लूट रहा प्रशासन सकते में तब आया जब एक शिकोहाबाद कि महिला की मौत हो गई । अभी उसका सेम्पल जांच का परिणाम आया भी नहीं था कि फरुखाबाद की महिला उसी पारस आस्पताल में मर गई । दोनों के पोजटिव पाए जाने से पैर आगरा के देहात बाह से एक महिला संक्रमित मिली । प्रशासन हर एक पल वही हरबार की तरह सील विसंक्रमित कार्रवाई की घोषणा करके गड़बड़ाता गया । इसी क्रम में फतेपुर सीकरी गाइड भी कम नहीं पड़ा । फतेहपुर सीकरी मलपुरा , सैंया से फैलता स्वाथ्य कर्मियो में फैलता हुआ विकराल रूप ले आगे बढ़ चला ।
अभी स्थिति नियंत्रण में हो पाती कि पारस आस्पताल का संक्रमण 11 जिलों तक जा फैला और मॉडल की धज्जियां एक साथ 25 हॉट स्पॉट बनाने पड़े ।
आगरा कोरोना की चपेट में था। जिला प्रशासन असहाय था । स्वास्थ विभाग के हाथ पैर फूलना स्वाभाविकता थी । लेकिन जब 22 की शाम लखनऊ से पारस आस्पताल खाली कराने के लिए आदेश आया तब पता चला प्रशासन के हाव भाव हाथी के दांतों की तरहथा। उसके खाने के दांत अलग लगे। 70 मरीज एफ आई आर के बाद भी अंदर इलाज जारी था । दो महिलाएं पहली शील बंदी केबाद मारीं गईं।
इससे पहले लॉक आउट को कड़ाई से लागू करने में पुलिस सक्रिय हुई तो जमाती व पारस के 190 रोगी प्रकाश में आये जिससे शासन के भी हाथ पांव फूलना स्वाभाविक था ।
15 अप्रेल के बाद से चले घटना कर्म ने कोरोना को आगरा को प्रोडक्टर माना जाने लगा । स्वयं मुख्यमंत्री –मुकि सचिव तक को यहां की पल पल की जानकारी लेनी पड़ी तब कहीं जाकर स्थिति 23 अप्रैल जी रात के बुलेटिन में निल पिजटिव था । मगर यह स्थित 24 को नहीं रही 6 केस और मिलना स्मापनिय स्थिति बनना लगा ।
आज 24 अप्रैल से अब समीक्षक कछुआओं की सक्रीयता बड़े ऐतिहातन समीक्षा रिपॉर्ट पढ़ने लिखने बैठ गए ।अब हमें सतर्कता बरतनी होगी । किसी के बरगलाने में न आएं ।अपना बयान सोच समझकर दें । जैसे उदबोधन आदि पर भी ध्यान भंग न करें ।
इधर प्रशासन अपनी भूल सुधारे पारस के डॉक्टर मालिक व प्रबंधक की गेर इरादतन हत्या का मामला बनता है दर्ज कराएं । तभी कुछ पाप घट संकेंगे।
और तब गांव और दरोगा की सीख काम आ सकेंगी ।
अगर परहेज भूले तो हालात कभी नहीं बदलेंगे । हमें पूरा साल लोकडाउन से ही गुजरना पड़े!

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