
बरेली । तहसील आंवला में सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ उठाने के लिए तथ्यों को छिपाकर बनाए गए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ईडब्लूएस के प्रमाण पत्र का भंडाफोड़ हुआ है। तहसील आंवला के ग्राम डप्टा श्यामपुर निवासी एक युवक ने शहर ब कस्बे में अपना मकान व कारखाना होने की जानकारी छिपाकर तथा अपने मूल पते में फेरबदल करके फर्जी तरीके से ईडब्लूएस प्रमाण पत्र हासिल कर BHU जैसे सरकारी संस्थान में प्रवेश ले लिया। शिकायत पर हुई उच्च स्तरीय जांच के बाद तहसीलदार आंवला ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम डप्टा श्यामपुर निवासी आयुष दीक्षित पुत्र सुनील कुमार दीक्षित ने तहसील कार्यालय से ईडब्लूएस प्रमाण पत्र जारी करवाया था। इस प्रमाण पत्र के आधार पर वह आर्थिक रूप से पिछड़े , सामान्य वर्ग के लिए दस प्रतिशत आरक्षित सरकारी लाभ लेकर सरकारी विश्वविद्यालय (बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी) में प्रवेश ले लिया था। हालांकि, मामले की भनक आकांक्षा दीक्षित को लगी, जिन्होंने साक्ष्यों के साथ इसकी शिकायत सीधे मंडलायुक्त से की।
शिकायतकर्ता में आरोप था कि आयुष दीक्षित ने जानबूझकर प्रशासन से अपनी संपत्ति का विवरण छिपाया है व मूल पते में भी फेरबदल किया है। गांव में पुश्तैनी जमीन के साथ-साथ बरेली शहर के मढ़ीनाथ जैसे पॉश इलाके में व सर्वोदय नगर में भी उनका अपना निजी मकान है। व बलिया कस्बे में भी कारखाना है। नियमानुसार, शहर व ग्रामीण क्षेत्र में निश्चित दायरे से अधिक का मकान होने पर व्यक्ति ईडब्लूएस श्रेणी के दायरे से बाहर हो जाता है।

मंडलायुक्त के निर्देश पर मामले की जांच तहसील प्रशासन को सौंपी गई। विभिन्न स्तरों पर राजस्व विभाग की टीम ने जब आयुष दीक्षित की चल-अचल संपत्ति का ब्योरा खंगाला, तो शिकायत के तथ्य सही पाए गए। बरेली शहर में मकान व आय के अन्य श्रोत होने की बात पुख्ता होते ही हड़कंप मच गया।
तहसीलदार की कार्रवाई
जांच रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार आंवला ब्रजेश कुमार वर्मा ने तत्काल प्रभाव से आयुष दीक्षित का ईडब्लूएस प्रमाण पत्र रद्द करने का आदेश जारी कर तुरंत प्रमाणपत्र कार्यालय में जमा करने का आदेश दिया है।