मैं गरीब हूं तो क्या है दीनों के नाथ तुम हो , राधे राधे गोविंद के भाव के साथ कथा का हुआ समापन

बरेली । बांके बिहारी मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में, वृंदावन धाम से पधारे आचार्य श्याम बिहारी चतुर्वेदी ने सप्तम विश्राम दिवस की कथा सुनाते हुए बताया, भगवान श्री द्वारकाधीश ने सुदामा जी की दरिद्रता को दूर किया, गरीब ब्राह्मण सुदामा, पत्नी के कहने पर द्वारकाधीश से मिलने के लिए जाते गये , चार मुट्ठी चावलों को लेकर के जाते हैं ,भगवान के समक्ष पहुंचे, भगवान ने जब देखा मेरा मित्र सुदामा आया है, बड़े ही भाव के साथ में सुदामा जी से मिले, उनका स्वागत सत्कार किया, उनके चरणों के जल का सिंचन पूरे द्वारका नगर किया गया, सुदामा जी यह सत्कार देखकर के अत्यंत प्रसन्न हुए, भगवान ने पूछा सुदामा जी आपको बचपन में शादी विवाह की बात अच्छी नहीं लगती थी, गुरुकुल के बाद आप अपनी कुटिया में पहुंच गए, आपको आपके अनुकूल पत्नी मिली कि नहीं सुदामा जी ने कहा की बिल्कुल इच्छा ना थी, लेकिन माता-पिता पीछे पड़ गए, और तेरी भाभी को नाम सुशीला है ,भगवान श्री कृष्ण ने पूछा मेरी भाभी ने मेरे लिए क्या भेजा है ,तब उन्होंने चार मुट्ठी चावल दिए, चावल के बदले द्वारकाधीश ने उनको दो लोक की संपत्ति का सुदामा को प्रदान किया, प्रदान करने के बाद सुदामा जी अपनी नगरी में जब पहुंचे , तो उन्होंने बड़े सुंदर महल देखकर के आश्चर्य में पड़ गई ,सब कैसे हुआ तो उनकी पत्नी है सुशील ने बताया ,कि सब द्वारकाधीश की कृपा है, तो द्वारकाधीश को धन्यवाद देते हुए , सुदामा जी ने कहा सच में ही ,मैं गरीब हूं तो क्या है दीनों के नाथ तुम हो, सभी के ऊपर कृपा करते हैं , अंतिम उपदेश श्री शुकदेव जी ने परीक्षित को दिया उसके भागवत जी का पूर्ण उपदेश करके भागवत जी को विश्राम दिया , इस मौके विनोद, भजन गायक जगदीश भाटिया,देवकीनंदन खंडेलवाल, सुनीता,आयुष सिंह,हिमांशु खंडेलवाल ,सीमा , देवांश ,स्वाति ,राघवेंद्र,दीपक, विनीता,गीता,सोनल,आदि

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पं.सत्यम शर्मा

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