
आज करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए श्रद्धा से रखती हैं। इस दिन सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व होता है, जो सौभाग्य, आस्था और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
करवा चौथ का पर्व पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना के लिए मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और माता करवा की श्रद्धापूर्वक पूजा करती हैं। यह उपवास न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाने वाला एक पावन अवसर भी है।
करवा चौथ पर सोलह श्रृंगार करने की परंपरा का भी विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन पूर्ण श्रृंगार करने से माता करवा प्रसन्न होती हैं और व्रती महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। सोलह श्रृंगार नारी सौंदर्य, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है, जो इस दिन की पूजा और व्रत को पूर्णता प्रदान करता है
करवाचौथ पर क्यों करें सोलह श्रृंगार?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ के दिन हर सुहागिन महिला को सोलह श्रृंगार करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह न केवल सौंदर्य और सज्जा का प्रतीक है, बल्कि अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र की कामना से जुड़ा हुआ है। पूजा से पहले महिलाएं सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, काजल, गजरा, नथ, अंगूठी, झुमके, मांग टीका, मंगलसूत्र, पायल, बिछिया, आलता, मेंहदी, बाजूबंद और कमरबंद आदि पहनकर पूरा श्रृंगार करती हैं। यह श्रृंगार माता करवा को समर्पित होता है, और माना जाता है कि इससे वे प्रसन्न होकर व्रती को सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं।
⚜️श्रृंगार का महत्व
卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐
करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाओं द्वारा किया गया सोलह श्रृंगार सिर्फ बाहरी सजावट नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक होता है। मान्यता है कि इस दिन पूरा श्रृंगार करने से पति की आयु लंबी होती है और दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। सोलह श्रृंगार में हर एक वस्तु का अपना विशेष महत्व होता है। जैसे, हाथों में रची मेंहदी पति-पत्नी के बीच प्रेम और जुड़ाव का प्रतीक मानी जाती है। गले में पहनाया गया मंगलसूत्र रिश्ते की मजबूती और स्थायित्व को दर्शाता है। वहीं माथे पर सजाई गई बिंदी स्त्री के सौभाग्य, सम्मान और सुरक्षा की प्रतीक मानी जाती है।
⚜️करवा चौथ 2025 तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐
करवा चौथ का पर्व इस साल 10 अक्तूबर 2025, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 9 अक्तूबर की रात 10:54 बजे शुरू होकर 10 अक्तूबर को सायं 7:38 बजे तक रहेगी। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं प्रातः 5:16 बजे से लेकर शाम 6:29 बजे तक के बीच पूजा कर सकती हैं। चंद्रमा का उदय शाम 7:42 बजे होगा, और महिलाएं इसी समय चंद्र दर्शन करके व्रत का पारण करती हैं।