
आपको पता है कि बाह से क्या आ जा रहा है?
कछ पुरा और चौरंगाहार के साथ सेकडों गाँव से शिक्षा स्वस्थ्य और मवेशी डाकघर लोप हो गए। दर्जन भर गाँवों को जाने बाली रोडवेज की बसें बन्द हो गई।
रोडवेज डिपो तो शुरू हुआ पर इटावा बटेश्वर, केजरा शिकोहबाद, बाह भिंड के पुराने मार्ग निजी बसें बन्द ही नहीं परिमिट तक खत्म हो गए।
अब राजा खेंडा धौलपुर मार्ग भी निजी बसों से विहीन हो गया।
एक नया मार्ग शुरू हुआ जरूर मगर इटवा वाया उदी की सेवाएं बन्द हो गई। इन मार्गों पर उनके औसत् में दस फीसादी भी बसे नहीं चल रही हैं । अफसोस इन सभी मार्गों पर औटो संचालित होने से यात्रा हानिकारक रहती : है।
आर्युवेद, जिला पंचायत और महिला अस्पताल भी धीरे धीरे लोप होते बताए गए हैं। नहर के बाद नलकूपों का रख रखाव भी प्रभावित हुआ है। हां वित्त विहींन शिक्षण सस्थाओं का खुलना अच्छी संख्या” में हुआ है। अटल विद्यालयों का स्वागत ही रहा है।
जो पुल ८८में चम्बल पर हूसेत घाट बाला नहीं बना तो:चम्बाल पर ही अटेर का पुल शुरू होने की स्थिति में है मगर हुसेत घाट का पुल अभी पूरा होता नहीं दिख रहा है ।
यह जो पुल यहाँ बनाके तो मध्य प्रदेश सरकार दे रही है मगर उत्तर प्रदेश सरकार लिंक रोड का हिस्सा का एन ओ सी जारी नहीं करा सका है।
विरासत को बचाने का जहाँ प्रयास जारी है वहीं बाह का विकास ठप है। खेल का मैदान नहीं कोई फिकर नहीं। मन चाहे गाँव विकसित हों रहा है❤
सांसद विधायक निधि से बटेश्वर का मोक्ष धाम तो संरक्षित रख पाना तो दूर इनसे आम स्थान तक का विकाश नहीं किया जा पा रहा है समूची विधान सभा का कैसे विकास सम्भव है
पक्ष विपक्ष में पत्राचार की होड़ लगी है। कोई २७के लिए तो कोई २९के लिए अभी से तैयारी में लगा है।
जिला जैसी मांग पर मुद्दा बनाने को लेकर स्थिति नहीं दिख रही है।
बाह के भोले ही हैं केवल वही कुछ भला करने की सोचेंगे तभी
पुलिस को छोड़ सभी क्षेत्रों में भला होना सम्भव है। अपन की तो हालत धोबी के कुत्ते जैसी है जो न घर न घाट का। मेरा नाम विकाश भी कह सकते हैं।जो आपके ऊपर है न कि जन प्रतिनिधियों पर। आप जागिये अपनी बात कहिए और अपने कर्तव्य के प्रति सजग रहिये तो सभी कुछ सम्भव है….
चलते चलते आपके सेंचुरी एरिया पर आपके और मौलिक विकास अधिकारों पर डाका डाले जाने की योजना इन विकास कराने के माध्यमों पर हैं। सावधान आप अपने कर्तव्यों का दायित्व समझिये कर्तव्यों के प्रति सजग रहिये……जारी