आंखें खोलने के लिए

मेरी पोस्ट ब्रांडेड अखबार या ब्रांडेड चैनलों में काम करने वाले पत्रकारों के लिए है।
उन्नाव से News nation चैनल के पत्रकार वीरेन्द्र 24 जुलाई 2018 का प्रकरण समझने के लिए काफी है
ये उदाहरण उन सभी पत्रकार साथियों के लिए है जो दिन रात तपती धूप में बारिश में और कंपा देने वाली ठंड में काम करके ना सिर्फ लोगो को इंसाफ दिलाते हैं बल्कि अपने संस्थान को भी उचाईयों पर ले जाते हैं.
लेकिन इस कड़ी मेहनत के बाद आपका संस्थान आपको देता क्या है…
एक चपरासी से भी कम वेतन.
और तो और, जब मन करता है तो अपने किसी फायदे के लिए आपको बाहर भी निकाल देता है….
सवाल ये है कि आखिर कब तक आपका ऐसा शोषण होता रहेगा…
वीरेन्द्र यादव द्वारा उद्घाटित किये उन्नाव के भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर रेप कांड मामले से आप सभी भूले नहीं होंगे..
इस खबर को सबसे पहले उन्होंने कवर करके पीड़िता की आवाज़ को उठाया था…
चैनल पर ख़बर चलाई थी…
इस ख़बर को कवरेज करने के दौरान विधायक के गुर्गो ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी थी…
लेकिन वे बिना डरे निष्पक्षता से पीड़िता की आवाज़ और भाजपा विधायक व उसके भाई की करतूत का सच दुनिया के सामने लाये….
चैनल ने भी ख़बर से खूब टीआरपी बटोरी…
इस खबर ने सत्तारूढ़ बलात्कारी विधायक और उसके भाई को जेल पहुंचा दिया…
इस खबर से लखनऊ से लेकर दिल्ली में बैठी बीजेपी सरकार की जमकर किरकिरी हुई…
नतीजन विधायक से लेकर पूरी सरकार के टारगेट पर वे आ गए…
खबर कवर करने के दौरान विधायक के गुर्गों ने उन्हें मारने की योजना भी बनाई लेकिन इस षडयंत्र की खबर लगते ही उन्होंने अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से लेकर शासन सत्ता के सभी आधिकरियों को चिट्ठी लिख दी..
इससे षड्यंत्रकारियों की योजना कामयाब नहीं हुई..
फिर क्या था…
सभी ने साजिश रचकर मुख्यमंत्री योगी के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार से चैनल मालिक संजय कुलश्रेष्ठ को फोन कराया और मृत्युंजय कुमार ने उनपर पर फ़र्ज़ी आरोप लगाकर उन्हें चैनल से बाहर निकालने का दबाव बनाया…
इस तरह सत्ता के आगे झुक गया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ…
चैनल मालिक ने उन्हें बिना वजह बताये चैनल से बाहर कर दिया…
वे लगातार पूछते रहे कि उनका कसूर क्या है…
लेकिन चैनल ने उनकी एक न सुनी…
वे चाहते तो अन्य दूसरे चैनल में ज्वाइन कर सकते थे लेकिन बकौल उनके ‘मेरी अंतरात्मा ने कहा कि ये तो फ़र्ज़ी आरोपों को स्वीकारना होगा…
आखिर कब तक पत्रकारों का शोषण होता रहेगा…
कब तक ये मीडिया संस्थान अपने पत्रकारों इस्तेमाल करते रहेंगे और शासन सत्ता की रखैल बनकर काम करेंगे…
उनकी खबर पर तो सीबीआई की रिपोर्ट ने भी मुहर लगा दी…
वे पूछते हैं कि ‘तो फिर मेरा कसूर क्या है…
क्यों मुझे सच दिखाने की सजा दी गयी…
रेप पीड़िता को इंसाफ तो मिल गया, मुझे कब मिलेगा… बस इन्हीं कुछ सवालों के साथ मैं इस मुहिम को आगे बढ़ाना चाहता हूँ… ताकि जो मेरे साथ हुआ वो मेरे किसी अन्य भाई के साथ ना हो…
इसलिए अपने अस्तित्व को समझे कि आप कहां खड़े हैं आपको कहां होना चाहिए
आप सशक्त पत्रकार संगठन के सक्रिय सदस्य बने और आप वीरेन्द्र यादव जैसे जुझारू पत्रकारों की ढाल बनें