मिसाइल की भी होती है एक्सपायरी, जानिए कितने दिनों के बाद हो जाती हैं खराब

Explainer: मिसाइल की भी होती है एक्सपायरी, जानिए कितने दिनों के बाद हो जाती हैं खराब
Missile Lifespan: इन दिनों इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष जारी है. जिसमें दोनों देश मिसाइलों का भरपूर प्रयोग कर रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मिसाइलों की भी एक्सपायरी डेट होती है.
Missile Lifespan: इजरायल और ईरान ने शुक्रवार को एक-दूसरे पर हवाई हमले जारी रखे. इसके साथ ही पश्चिम एशियाई प्रतिद्वंद्वियों के बीच संघर्ष दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया. जिससे पूर्ण युद्ध और व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंकाएं गहरा गई हैं. यह संघर्ष 13 जून को तेहरान पर इजरायल के हमले से शुरू हुआ था, जिसमें कई शीर्ष सैन्य अधिकारी, वरिष्ठ वैज्ञानिक और 20 बच्चों सहित कम से कम 60 नागरिक मारे गए थे. तब से इजरायल ने इस्लामिक गणराज्य की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाना जारी रखा है. तेहरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. दोनों देश पिछले सात दिनों से सैन्य और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर एक दूसरे पर जवाबी हमले कर रहे हैं.
ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलें दागने के अलावा इजरायल के ऊपर हाइपरसोनिक मिसाइलों से हमला करने का दावा किया है. ये पहली बार है जब इजरायल के साथ युद्ध में ईरान ने अपनी घातक मिसाइल फतह-1 का प्रयोग किया है. हाइपरसोनिक मिसाइलें आज के सबसे उन्नत हथियारों में से एक हैं. ये मिसाइलें पृथ्वी के वायुमंडल में अविश्वसनीय गति से यात्रा करती हैं, जिससे दुश्मन के लिए उनका पता लगाना और उन्हें रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है. इनकी गति ध्वनि की गति से कम से कम पांच गुना अधिक होती है. जिसका अर्थ है कि ये 6,100 किलोमीटर प्रति घंटे से भी तेज रफ्तार से उड़ सकती हैं.
जी हां, मिसाइल भी होती हैं एक्सपायर इन सबके बीच एक बड़ा सवाल ये है कि क्या हथियारों की भी एक्सपायरी डेट होती है? दरअसल हमने अब तक दवा, फूड आइडम्स की एक्सपायरी डेट के बारे में सुना था. लेकिन हथियारों के बारे में अब तक इस तरह की बात सामने नहीं आई थी. आइए समझने की कोशिश करते हैं कि क्या सच में ऐसा होता है? अगर हां तो मिसाइल की एक्सपायरी डेट कितनी होती है. मिसाइल में भी रासायनिक विघटन की वजह से उनकी ऊर्जा उत्पादन क्षमता कम हो जाती है, इस पर ईंधन की बूंदें नजर आती हैं जो इसे असुरक्षित बना देती हैं. ज्यादा पुरानी होने की वजह से इनकी धातुओं में या तो जंग लग जाती है या घिसावट आ जाती है. जिससे ये कमजोर हो जाती हैं और टारगेट से पहले ही धमाका कर सकती हैं.
पहले 10 साल था मिसाइल का जीवन दुनिया की पहली इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) सोवियत R-7 सेम्योरका 21 अगस्त 1957 को सफलतापूर्वक लॉन्च की गई थी. यह लॉन्च न केवल शीत युद्ध में एक महत्वपूर्ण क्षण था, बल्कि इसने युद्ध की प्रकृति को भी बदल दिया. पिछले कुछ सालों में आईसीबीएम तेज और अधिक सटीक हो गई हैं, लेकिन उनकी भी एक्सपायरी डेट होती है. उदाहरण के लिए अमेरिका की मिनटमैन मिसाइल परिवार को ही लें. मिनटमैन II का विकास 1964 में शुरू हुआ था और यह 1970 से सेवा में है. मूल रूप से मिनटमैन III का अनुमानित जीवनकाल लगभग दस साल का था. लेकिन लगातार अपग्रेड होने के कारण इसका जीवनकाल 21वीं सदी तक बढ़ गया. उम्मीद है कि अमेरिका 2030 तक मिनटमैन III पर निर्भर रहेगा. इसका मतलब है कि यह अपनी मूल डिजाइन जीवन से 30-40 साल से अधिक समय तक सेवा में रहेगी.
30 साल में बूढ़ी हो जाती है आईसीबीएम 2024 में एक स्टडी में चीनी रॉकेट वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया कि इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें पहले की तुलना में बहुत तेजी से बूढ़ी होती हैं. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार उनकी स्टडी में पाया गया कि ठोस मिसाइल ईंधन का क्षरण केवल 30 सालों के भीतर हो सकता है. यह एक चौंकाने वाला निष्कर्ष है. क्योंकि पहले यह माना जाता था कि यह ईंधन सामान्य भंडारण स्थितियों में 160 से अधिक सालों तक स्थिर रहेगा.
बढ़ जाता है विफलता का जोखिम इस अध्ययन से पता चला कि ICBM में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाला ठोस फ्यूल प्रोपलैंट समय के साथ स्ट्रक्चरल बदलाव से गुजरता है और काफी अधिक नाजुक हो जाता है. हालांकि भंडारण के दौरान यह स्थिर प्रतीत होता है. जब यह खराब होता है तो ईंधन प्रोजेक्शन के दौरान अनुभव होने वाले दबाव को सहन करने की अपनी क्षमता खो देता है. दूसरे शब्दों में केवल 30 सालों के भीतर इग्निशन या उड़ान के दौरान विफलता का जोखिम नाटकीय रूप से बढ़ जाता है. कई मिसाइलें ऐसी होती हैं जो तैनात तो होती हैं, मगर कभी प्रयोग में नहीं लाई जातीं. एक निश्चित सीमा के बाद इन्हें एक्सपायर करार दे दिया जाता है और इनकी जगह नए मिसाइल ले लेती हैं.
किस पर निर्भर उसका टिकाऊपन वास्तव में पिछले कुछ सालों में मिसाइलों के इग्निशन और परीक्षण लॉन्च में विफलताएं हुई हैं. नवंबर 2023 में एक अमेरिकी मिनुटमैन III मिसाइल को अपनी उड़ान के दौरान समस्याएं हुईं और उसे सेल्फ डिस्ट्रक्ट करना पड़ा. कुछ ही महीनों बाद एक ब्रिटिश नौसेना ट्राइडेंट II मिसाइल पनडुब्बी से लॉन्च के दौरान विफल हो गई. ये दोनों मिसाइलें ठोस फ्यूल प्रोपलैंट पर निर्भर करती थीं. किसी भी हथियार की एक्सपायरी डेट इस बार पर निर्भर करती है कि हथियार कैसा है, उसकी डिजाइन कैसी है, उसे बनाने में किस तरह की सामग्री प्रयोग की गई है. इसके अलावा उसकी टेक्नोलॉजी और व्यावहारिक कारकों पर भी ये निर्भर करता है. मसलन किसी हथियार में किस तरह की धातु, प्लास्टिक और विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया है. ज्यादातर मामलों में स्टील या टाइटेनियम जैसे उच्च गुणवत्ता वाली धातुओं से बने हथियार कुछ लंबे समय तक टिक सकते हैं.
किस पर निर्भर उसका टिकाऊपन वास्तव में पिछले कुछ सालों में मिसाइलों के इग्निशन और परीक्षण लॉन्च में विफलताएं हुई हैं. नवंबर 2023 में एक अमेरिकी मिनुटमैन III मिसाइल को अपनी उड़ान के दौरान समस्याएं हुईं और उसे सेल्फ डिस्ट्रक्ट करना पड़ा. कुछ ही महीनों बाद एक ब्रिटिश नौसेना ट्राइडेंट II मिसाइल पनडुब्बी से लॉन्च के दौरान विफल हो गई. ये दोनों मिसाइलें ठोस फ्यूल प्रोपलैंट पर निर्भर करती थीं. किसी भी हथियार की एक्सपायरी डेट इस बार पर निर्भर करती है कि हथियार कैसा है, उसकी डिजाइन कैसी है, उसे बनाने में किस तरह की सामग्री प्रयोग की गई है. इसके अलावा उसकी टेक्नोलॉजी और व्यावहारिक कारकों पर भी ये निर्भर करता है. मसलन किसी हथियार में किस तरह की धातु, प्लास्टिक और विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया है. ज्यादातर मामलों में स्टील या टाइटेनियम जैसे उच्च गुणवत्ता वाली धातुओं से बने हथियार कुछ लंबे समय तक टिक सकते हैं.

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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