भर्ती के नाम पर बसूली कर रहा युवक पकड़ कर छोड़े जाने की चर्चा

एटा के सरकारी मेडिकल बोर्ड पर फिर उठी उंगलियां…!
*पुलिस लाइन में आरक्षी मेडिकल की बोर्ड हड्डी रोग विशेज्ञ बदले गये
*भर्ती के नाम पर बसूली कर रहा युवक पकड़ कर छोड़े जाने की चर्चा
एटा। जिले के स्वास्थ महकमे में पुलिस भर्ती में मेडिकल जांच का अवसर मिलते हैं स्वास्थ अफसरों की बांछे खिल जाती हैं क्योंकि भर्ती में बसूली का खेल सबके बारे न्यारे कर देता है।गत वर्ष भी खुले आम भारी बसूली को लेकर खासी थुक्का फजीहत हुई थी इस बार 8 सितम्बर से शुरू हुए मेडिकल परीक्षण को लेकर उंगलियां उठने लगी हैं यद्यपि इस बोर्ड में मुख्य चिकित्सा अधिकारी का हस्तक्षेप नही रहा है परन्तु जिला अस्पताल के सीएमएस की अध्यक्षता में जो बोर्ड गठित हुआ उसमें पहले दिन ही नियम विरुद्ध सदस्यों के भागेदारी पर सवाल उठाये गये परिणाम स्वरुप संविदा डॉक्टर हड्डी रोग को हटाना पड़ा जिसकी भरपाई कासगंज के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ राम अवतार को बुला कर की गई । इसी तरह पुलिस लाईन अस्पताल के स्टाफ को दरकिनार कर काम कराया जा रहा है। इधर भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष सीएमएस के कोरोना पोजेटिव होने की खबर को लेकर भी अलग सवाल उठाए गए जिस पर सीएमएस ने 6 सितम्बर को कोरोना निगेटिव रिपोर्ट प्रेस को दिखाई है। विभागीय सूत्र बताते हैं कोरोना रिपोर्ट पूर्व में संदिग्ध दर्शाई गई थी जिसे दुबारा कन्फर्म किया गया तो निगेटिव आई। इधर आज मेडिकल बोर्ड में पास कराए जाने को लेकर अनेक लोगो द्वारा पैसा बसूलने की चर्चा है आज यह खबर में दिन भर चर्चा में रही कि जिला अस्पताल में डॉक्टर अफसरों का बगलगीर खास दलाल पुलिस ने पकड़ा परन्तु छोड़ दिया गया जबकि बताया गया उक्त दलाल पर मोटी रकम पाई गई साफ जाहिर है पुलिस ने वैसे ही तो नही छोड़ा होगा..?कुल 159 आरक्षियों का परीक्षण होना जो प्रतिदिन 50 के हिसाब से कोरोना जांच के बाद किया जा रहा है 8 सितम्बर को 2 कोरोना पोजेटिव 9 सितम्बर को 1 कोरोना पोजेटिव प्रशिक्षु पाये गये जिनका मेडिकल बाद में किया जाएगा। इन आरक्षियों में 8 महिला आरक्षी हैं। महिला डॉक्टर के रूप में डॉक्टर उपमा सिंह को शामिल किया गया है।
बरहाल चाक चौबंद व्यवस्था का दिखावा करने बाला स्वास्थ विभाग का यह मेडिकल बोर्ड अंदरखाते से व्यवस्था का ‘खेल’ चलाये हुये है। जिसकी बानगी सुबह सुबह पुलिस लाइन परिसर में देखी जा सकती है। मजे की बात यह है कि इस बसूलयावी को लेकर कोई पीड़ित सामने नही आता क्योकि कोई नही चाहता सलेक्शन होने के बाद लगी लगाई नोकरी में कोई अड़चन आये परिणाम स्वरूप मनचाही कीमत भर्ती के नाम पर बसूली जा रही है। भृष्टाचार मुक्त व्यवस्था का एलान करने बाली सरकार के राज में है कोई अंदरूनी भृष्टाचार को देखने बाला…???

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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