पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग हुई बुलंद

लखनऊ, उत्तर प्रदेश: डीजीपी राजीव कृष्ण ने मीडियाकर्मियों के सम्मान पर दिया जोर,
पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग हुई तेज
जबकि एके बिंदुसार ने पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने पर बल दिया।
उत्तर प्रदेश, लखनऊ:
उत्तर प्रदेश के नव-नियुक्त पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने पदभार संभालने के बाद लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय से अधिकारियों को मीडियाकर्मियों के साथ बेहतर व्यवहार करने के लिए स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए हैं। डीजीपी ने सभी पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया है कि मीडियाकर्मियों को किसी भी परिस्थिति में परेशान न किया जाए, उनकी बातों को गंभीरता से सुना जाए और उनका पूरा सम्मान किया जाए। यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब पत्रकारों पर हमलों और उनके खिलाफ अनुचित व्यवहार की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।
डीजीपी राजीव कृष्ण के इस कदम को मीडिया जगत में एक सकारात्मक पहल के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि “मीडिया देश को गढ़ने और संवारने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।” उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी भी दी कि मीडिया का अपमान करने वाले या उनके साथ दुर्व्यवहार करने वाले किसी भी अधिकारी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इसी संदर्भ में, डीजीपी ने मीडिया से भी सहयोग की अपील की। उन्होंने पत्रकारों से अनुरोध किया कि वे किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की गहनता से जांच करें और सटीक जानकारी ही साझा करें। उनका मानना है कि पुलिस और मीडिया के बीच सहयोग से अपराधियों के मंसूबों को सफलतापूर्वक नाकाम किया जा सकता है। डीजीपी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि “किसी भी घटना के खुलासे में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।”
अपने संबोधन में, डीजीपी ने पुलिस अधिकारियों को यह भी हिदायत दी कि वे अच्छे और कानून का पालन करने वाले नागरिकों के साथ सौहार्दपूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार करें, जबकि अपराधियों के साथ पूरी कड़ाई से पेश आएं। इन निर्देशों का मूल उद्देश्य उत्तर प्रदेश की जनता में पुलिस के प्रति विश्वास को पुनः स्थापित करना और उन्हें सुरक्षा एवं राहत का एहसास दिलाना है।
पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग हुई बुलंद
हालांकि, डीजीपी के इन सकारात्मक निर्देशों के बावजूद, भारतीय मीडिया फाउंडेशन के संस्थापक और इंटरनेशनल मीडिया आर्मी के संयोजक, एके बिंदुसार ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण और लंबित मांग को फिर से उठाया है। बिंदुसार ने डीजीपी महोदय के बयान की तहे दिल से प्रशंसा करते हुए कहा कि यह एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल निर्देशों से पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
एके बिंदुसार ने पुरजोर तरीके से मांग की कि उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में “पत्रकार सुरक्षा कानून” को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। उन्होंने अपने बयान में कहा, “जब तक पत्रकार सुरक्षा कानून प्रभावी रूप से लागू नहीं हो जाता, तब तक यह स्वीकार करना न्यायसंगत नहीं होगा कि पत्रकार सुरक्षित हैं।” बिंदुसार ने पत्रकारों पर होने वाले हमलों, धमकियों और उन्हें अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए इस कानून की आवश्यकता पर बल दिया।
उनकी इस मांग ने एक बार फिर पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चल रही बहस को गरमा दिया है। डीजीपी के मीडिया-अनुकूल निर्देशों के बावजूद, जमीनी स्तर पर पत्रकारों को अक्सर गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें शारीरिक हमले, मानहानि के मुकदमे और धमकियां शामिल हैं।
एके बिंदुसार की यह मांग इन वास्तविकताओं को उजागर करती है और यह दर्शाती है कि केवल अच्छे व्यवहार के निर्देश पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पत्रकारों को कानूनी सुरक्षा कवच प्रदान करना भी अत्यंत आवश्यक है। इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है ताकि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को बिना किसी भय या दबाव के अपना काम करने का अवसर मिल सके।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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