
आगरा। आगरा बाह राजकीय मार्ग पर रोडवेज बसों को नहीं चलने दिया जा रहा है। उनके आगे पीछे प्रति १५मिनट पर डग्गा मार बसें रोडवेज किराये से दस रुपये कम किराये पर दोड रहीं हैं । रोडवेज बसे अनूबन्धन प्रक्रिया के तहत संचालित हैं। इन बसों पर चालक बस मालिकों के होने की वजह से डग्गा मार बसों को पूरा समर्थन देकर खाली चल रही हैं। निजी बसें कम किराया और कम समय में बाह से आगरा और आगरा से बाह प्नहुँचा रही हैं। निजी बसे आज भी बिजलीघर से ही भरी जाती हैं। जबकि कागजो पर रोडवेज की बसे ईदगाह से संचालित है। रोडवेज बसों में किराया भी एक;रुपया बढ़ा दिया है लेकिन ये बसे निजी बसों से पेक्ट कर चल रही हैं । सरकारी बसे इदगाह न जाकर किला के टेम्पू स्टैंड तक ही छोड़ती हैं। ये बसे किराया ईदगाह का ले मंजिल तक नहिं जा रास्ते में ही छोड़ रही है। जिससे यात्री अच्छे खासे परेशांन हैं
आगरा बाह ही नहीं इटवा शिकोहाबाद और भिंड की और जाने वाले रोडवेज की बसें इसी व्यवस्था के तोर पर डग्गामार बसों का बोल बाला है।
सबसे ज्यादा संन सनी तो इस बात से है कि अनुबन्धित और डागामार् माफिया बिजली घर पर किराये से बस स्टैंड तक संचलित कर रहे हैं।
रोडवेज बस के चालक परिचालक सवारियों के साथ झगड़ा कर गुंडों जैसा व्यवहार करते हैं। एक रोडवेज बस सत्तर किमी की दूरी तीन घण्टे में तय करती है। बस में फर्स्ट एड तक नही है। परिवाद पुस्तिका तो अब कहीं नहीं है। ये बसें केवल मालवाहक बन कर रह गई हैं। पूरी रास्ते मिलने वाली सवारी ये नहीं उठाते। एक और आश्चर्य हो रहा है आगरा से बाह और फतेहाबाद होकर थ्री व्हीलर आवाज देकर चलने लगे हैं। सरकारी बस स्टेंड से नियमित निजी बसों का संचालन डंके की चोट पर हो रही डग्गेमारी का अनुपम उदाहरण ही है।