
मिर्ज़ापुर: चुनार में ज़मीन विवाद ने पकड़ा तूल, पीड़िता ने न्यायालय के आदेश के बावजूद न्याय न मिलने का आरोप लगाया।
मिर्ज़ापुर, उत्तर प्रदेश:
मिर्ज़ापुर जिले के चुनार थाना क्षेत्र के ग्राम सभा पुरुषोत्तमपुर से एक महिला ने अपनी पुश्तैनी ज़मीन पर अवैध कब्ज़े और उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता का दावा है कि न्यायालय से स्टे ऑर्डर होने और राजस्व विभाग द्वारा सीमांकन किए जाने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है, और स्थानीय प्रशासन व पुलिस से कोई मदद नहीं मिल पा रही है।
पीड़िता के अनुसार, कुछ दबंगों द्वारा उनकी नंबर की ज़मीन पर जबरन कब्ज़ा किया जा रहा है। जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो विरोधी पक्ष ने न सिर्फ मारपीट और अभद्र व्यवहार किया, बल्कि गाली-गलौज भी की। यह ज़मीन सड़क किनारे स्थित है, जिसकी पैमाइश के लिए राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी। टीम ने ज़मीन का विधिवत सीमांकन किया और सीमा निर्धारित करने के लिए पत्थर के पिलर भी गढ़वाए।
हालांकि, राजस्व टीम के वापस लौटते ही, विपक्षियों ने इन पिलरों को उखाड़ फेंका और पीड़िता के टीन शेड के मकान को भी धराशाई कर दिया। इस घटना के बाद, पीड़िता ने तुरंत 112 नंबर डायल कर पुलिस को सूचना दी।
पीड़िता ने बताया कि रात लगभग 10 बजे वह कोतवाली चुनार पहुंचीं और अपना प्रार्थना पत्र दिया। उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया गया कि “सुबह आइएगा, आपके साथ न्याय होगा।” लेकिन, अगली सुबह जब वह अपने परिवार और बच्चों के साथ न्याय की उम्मीद में दोबारा थाने पहुंचीं, तो उन्हें चौंकाने वाला अनुभव हुआ। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने उल्टा उनके ही परिवार के लोगों का चालान कर दिया, जबकि वे न्याय के लिए गिड़गिड़ाती रहीं। उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।
न्यायालय के आदेश की अवहेलना का आरोप:
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता ने अपनी ज़मीन को लेकर न्यायालय से स्टे ऑर्डर भी प्राप्त किया है। न्यायालय ने पीड़ित पक्ष को रहन-सहन और अपने कार्य को करने का आदेश दिया है, जिसमें किसी भी प्रकार के भेदभाव न करने की बात कही गई है।
इसके बावजूद, पीड़िता का आरोप है कि एसडीएम चुनार और कोतवाली थाना चुनार से उन्हें किसी भी प्रकार की सहायता नहीं मिल रही है। पीड़िता ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस ने उनकी एक भी नहीं सुनी, उनके पत्रावली को ठीक से देखा भी नहीं, और न्यायालय के आदेश का पालन नहीं कराया।
पीड़िता ने बताया कि विपक्षी बलशाली और संख्या में अधिक हैं, जिससे उन्हें और उनके परिवार को खतरा बना हुआ है। वे शासन और प्रशासन से न्याय और अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगा रही हैं। यह मामला पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े करता है कि क्या न्यायालय के आदेशों का पालन हो रहा है और क्या पीड़ितों को समय पर न्याय मिल पा रहा है।
यह घटना पुलिस और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है।