
नई दिल्ली, 2 जून 2025 –
देश भर में पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सरकारी कार्यालयों और विशेष रूप से पुलिस थानों में बढ़ते उत्पीड़न को देखते हुए, भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने केंद्र और राज्य सरकारों से तत्काल प्रभाव से सभी पुलिस थानों में ‘मीडिया सेंटर’ स्थापित करने की पुरजोर मांग की है। इस मांग का मुख्य उद्देश्य न केवल पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक नागरिक को न्याय मिले और पीड़ित व्यक्ति पुलिस को प्रार्थना पत्र देते समय मीडिया सेंटर को भी अपनी समस्या से अवगत करा सके।
भारतीय मीडिया फाउंडेशन और इंटरनेशनल मीडिया आर्मी के संस्थापक, एके बिंदुसार ने इस संबंध में अपनी दृढ़ राय व्यक्त करते हुए कहा, “अब समय आ गया है कि प्रत्येक पुलिस थाने के भीतर ही मीडिया सेंटर की स्थापना होनी चाहिए।” बिंदुसार ने जोर देकर कहा कि यह कदम पत्रकारिता की स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और आम आदमी की सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
शीर्ष नेतृत्व से तत्काल हस्तक्षेप की अपील
बिंदुसार ने केंद्र सरकार में माननीय प्रधानमंत्री महोदय और महामहिम राष्ट्रपति महोदया से, तथा राज्य सरकारों में माननीय मुख्यमंत्री महोदय और महामहिम राज्यपाल महोदय से इस महत्वपूर्ण मांग पर तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि सर्वोच्च स्तर से हस्तक्षेप ही इस गंभीर और व्यापक समस्या का स्थायी समाधान प्रदान कर सकता है।
राष्ट्रव्यापी आंदोलन का आह्वान करते हुए एके बिंदुसार ने पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान किया है। उन्होंने सभी जिलों से यह मांग की है कि वे उपरोक्त मांग को लेकर संबंधित जिलाधिकारी महोदय और पुलिस कमिश्नर महोदय को ज्ञापन पत्र देने का कार्य तत्काल प्रभाव से प्रारंभ करें। बिंदुसार ने कहा, “यह एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बनना चाहिए ताकि सरकारें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान देने के लिए विचार करें और जनता की आवाज सुनी जा सके।”
क्यों आवश्यक है ‘मीडिया सेंटर’?
हाल के समय में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां पत्रकारों को अपनी रिपोर्टिंग के कारण या सामाजिक कार्यकर्ताओं को जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाने के लिए सरकारी अधिकारियों या पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया गया है। कभी उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी जाती है, तो कभी अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है। इन परिस्थितियों में, थानों के भीतर एक ‘मीडिया सेंटर’ की स्थापना से कई महत्वपूर्ण लाभ होंगे:
पारदर्शिता में वृद्धि: मीडिया सेंटर पुलिस थानों के कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाएगा, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा: यह उन्हें पुलिस थानों में काम करते समय एक सुरक्षित और मान्यता प्राप्त स्थान प्रदान करेगा, जिससे उनके उत्पीड़न की घटनाओं में कमी आएगी।
नागरिकों को न्याय की पहुंच: पीड़ित व्यक्ति सीधे मीडिया सेंटर को अपनी समस्या से अवगत करा पाएगा, जिससे उसकी आवाज अधिक प्रभावी ढंग से उठाई जा सकेगी और उसे न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी। यह पुलिस पर भी दबाव बनाएगा कि वे शिकायतों को गंभीरता से लें।
सूचना का सहज प्रवाह: यह पुलिस और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगा, जिससे निष्पक्ष और सटीक रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिलेगा और जनता तक सही जानकारी पहुंच सकेगी।
भारतीय मीडिया फाउंडेशन का यह कदम पत्रकारिता की स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अब देखना यह है कि केंद्र और राज्य सरकारें इस मांग पर कितनी गंभीरता से विचार करती हैं और कब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाती हैं।