वाराणसी में क्रांति का शंखनाद! पत्रकारों के उत्पीड़न के खिलाफ कृष्ण कांत जायसवाल का दहाड़

वाराणसी में क्रांति का शंखनाद! पत्रकारों के उत्पीड़न के खिलाफ कृष्ण कांत जायसवाल का दहाड़, संवैधानिक दर्जा की मांग पर हुंकार!
वाराणसी न्यूज़।
वाराणसी पूर्वी उत्तर प्रदेश की धड़कन! यहीं से फूटा है पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा की लड़ाई का बिगुल! भारतीय मीडिया फाउंडेशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता निर्भीक आवाज कृष्ण कांत जायसवाल ने अपने पूर्वांचल दौरे के केंद्र वाराणसी में डेरा डालकर अन्याय के खिलाफ सीधी टक्कर का ऐलान कर दिया है!
उन्होंने अकेले नहीं, बल्कि भारतीय मीडिया फाउंडेशन के उन चट्टान सरीखे स्तंभों के साथ मिलकर इस महासंग्राम की रणनीति तैयार की, जिनके कंधों पर सत्य की मशाल हमेशा जलती रहती है। यूनियन के केंद्रीय मैनेजमेंट अफेयर्स कमेटी के केंद्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक संगठन के शिल्पकार एके बिंदुसार, संस्थापक मंडल के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय चेयरमैन कुशल रणनीतिकार संजय कुमार मौर्य, राष्ट्रीय डिप्टी चेयरमैन प्रशासनिक संगठन के कुशल प्रबंधक अजय सेठ, ज्वाइंट केंद्रीय अध्यक्ष मैनेजमेंट कर्मठ योद्धा मदन मोहन पाठक, परिवहन फोरम के राष्ट्रीय प्रवक्ता तेजतर्रार आवाज मिंटू राजभर, परिवहन फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऊर्जावान नेतृत्व अजय चौबे और उत्तर प्रदेश संगठन सचिव संगठन की मजबूत कड़ी मनोज विश्वकर्मा एवं मिशन में सक्रिय वाराणसी जिला उपाध्यक्ष मोहम्मद मुख्तार जैसे दिग्गजों की उपस्थिति ने इस मिशन को और भी धार दी!
जायसवाल ने अपने जोशीले संबोधन में देश और प्रदेश में पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हो रहे बर्बर अत्याचारों की कड़ी निंदा की। उनकी आवाज में आक्रोश था, जब उन्होंने इस सुनियोजित उत्पीड़न को सरकार की साजिश करार दिया। उन्होंने ललकारा कि यदि सरकार सच में पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की परवाह करती है, तो यह दमनचक्र क्यों जारी है? क्यों सच्चाई की आवाज को कुचलने का षड्यंत्र रचा जा रहा है?
उन्होंने केंद्र सरकार की उस दोगली नीति पर सीधा प्रहार किया, जिसमें कुछ चाटुकार मीडिया घरानों को पाल-पोसकर उनसे अपनी झूठी वाहवाही करवाई जा रही है। जायसवाल ने चुनौती दी कि यदि हिम्मत है, तो कश्मीर की जमीनी हकीकत से जुड़ी हर खबर की निष्पक्ष जांच करवाई जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके!
उनकी वाणी में क्रांति का आह्वान था, जब उन्होंने हर पत्रकार से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि अब डरने का नहीं, बल्कि अपने हक के लिए सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करने का वक्त आ गया है! उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इंटरनेशनल मीडिया आर्मी के माध्यम से सभी पत्रकार संगठनों को एक साझा मंच पर लाने का पुरजोर प्रयास किया जा रहा है, ताकि एकता की शक्ति से हर दमनकारी आवाज को खामोश किया जा सके।
जायसवाल ने मीडिया को संवैधानिक दर्जा दिलाने और निष्पक्ष पत्रकारों के कल्याण के लिए मीडिया पालिका और मीडिया कल्याण बोर्ड जैसी महत्वपूर्ण मांगों को पुरजोर तरीके से उठाने की रणनीति का खुलासा किया। और फिर आया वो ऐलान, जिसने वाराणसी की धरती को आंदोलित कर दिया – जल्द ही एक बड़े आंदोलन की ज्वाला इसी पवित्र नगरी से प्रज्ज्वलित होगी!
यह सिर्फ एक खबर नहीं, यह एक संकल्प है! यह अन्याय के खिलाफ एक दहाड़ है! यह मीडिया की स्वतंत्रता और पत्रकारों के सम्मान के लिए एक निर्णायक युद्ध का आगाज है! वाराणसी अब इस महासंग्राम का केंद्र बनेगा, और हर सच्ची आवाज मिलकर इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाएगी!

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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