जनपद एटा
दिनांक-06.05.2025

“ऑपरेशन जागृति फेज-4.0”
एटा- “ऑपरेशन जागृति फेज-4.0” अभियान के तहत क्षेत्राधिकारी नगर श्री अमित कुमार राय द्वारा कोतवाली नगर क्षेत्रांतर्गत तथा जनपदीय पुलिस द्वारा नारी सशक्तिकरण, साइबर सुरक्षा, महिला उत्पीडन की रोकथाम एवं महिलाओं के प्रति हिंसा एवं नशे से होने वाले दुष्प्रभावों जैसे गम्भीर विषयों पर जागरूकता बढाने हेतु अपने अपने थानाक्षेत्र में कार्यक्रम आयोजित कर संवाद स्थापित करते हुए छात्र/ छात्राओं व महिलाओं व आमजन को किया जागरूक।
♦️ जागरूक बने जागरूक बनाएं ♦️
‼️ ऑपरेशन जागृति की मुख्य उद्देश्य ‼️
♦️महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम।
♦️जागरूक करना कि झूठे प्रकरण दर्ज करना कानून का दुरुपयोग है।
♦️साइबर हिंसा के प्रति लोगों को जागरूक करना।
♦️युवाओं में प्रेम संबंधों के अपराधीकरण की रोकथाम हेतु मार्गशन करना।
♦️युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के संबंध में जागरूक करना।
अपर पुलिस महानिदेशक आगरा जोन आगरा महोदया श्रीमती अनुपम कुलश्रेष्ठ के निर्देशन में महिलाओं एवं बालिकाओं के जागरूकता व स्वावलंबन एवं उनके प्रति होने वाले अपराधों में कमी लाने हेतु चलाए जा रहे "ऑपरेशन जागृति 4.0" अभियान के तहत आज दिनांक 06.05.2025 को क्षेत्राधिकारी नगर श्री अमित कुमार राय द्वारा कोतवाली नगर क्षेत्रांतर्गत तथा जनपदीय पुलिस द्वारा अपने अपने थानाक्षेत्र में गोष्ठी आयोजित कर, छात्र एवं छात्राओं से संवाद स्थापित कर उनको जागरूक किया गया, साथ ही गोष्ठी में प्रतिभाग करने वाले छात्र/छात्राओं से फीडबैक भी लिया गया। अक्सर पारिवारिक विवाद / पारस्परिक भूमि विवाद का यथोचित समाधान नहीं दिखने पर अपराधिक घटनाओं में महिला सम्बन्धी अपराधों को जोड़ने की प्रवृत्ति भी सामाजिक रूप से देखने को मिल रही है। संक्षेप में कई अन्य प्रकरणों में ऐसी घटनायें दर्ज करा दी जाती हैं, जिनको बाद महिला एवं बालिकाओं संबन्धी अपराधों की श्रेणी में परिवर्तित कर दिया जाता है। जबकि मूलतः यह पारिवारिक और भूमि विवाद संबन्धी होती है। दूसरी ओर वास्तविक रूप से महिलाओं एवं बालिकाओं के विरूद्ध जो अपराध होते हैं, उनमें दुष्कर्म, शीलभंग जैसे संगीन मामलों में प्रताड़ित महिलाओं एवं बालिकाओं की मनोस्थिति काफी हद तक प्रभावित होती है और पीड़िता के जीवन में उस घटना का ट्रॉमा और भय सदैव के लिए बस जाता है। उक्त मानसिक आघात से उभरने के लिए पीड़िता को मनोवैज्ञानिक परामर्श की भी आवश्यकता होती है। एक अन्य प्रकार का ट्रेंड जो सामने आ रहा है, उसमें नाबालिग बालिकाएं लव अफेयर, इलोपमेंट, लिव इन रिलेशनशिप जैसे सेनेरियो में फँस जाती हैं और किन्ही कारणों से उनको समझौता करना पड़ता है। कई बार बालिकायें अपनी सहमति से भी बिना सोचे समझे चली जाती है। साथ ही साथ बदनामी के भय से ऐसा संत्रास झेलना पड़ता है, जिसके कारण वह ऐसी स्थिति से निकलने में अपने आपको अक्षम महसूस करती है। परिवार में आपसी संवादहीनता और अभिभावकों से डर के कारण बालिकाए अपनी बात कह नहीं पाती है। इसके अतिरिक्त आज तकनीक के दुरूपयोग के चलते महिलाओं एवं बालिकाओं के प्रति साइबर बुलिंग के मामले भी सामने आ रहे है। इन सभी परिस्थितियों में सामाजिक जागरूकता, संवाद शिक्षा और परामर्श की बेहद आवश्यकता है ताकि महिलायें एवं बालिकायें इस प्रकार के षड़यंत्रों का शिकार न बने भावनाओं में बहकर अपना जीवन बर्बाद न करें, यदि उनके साथ किसी प्रकार का अपराध घटित होता है तो वह सच बोलने की हिम्मत रख पाये और विधिक कार्यवाही के साथ-साथ उनको परामर्श/सहयोग और पुनर्वास का मौका मिल सके।जागरूक किया गया।