जनपद एटा में बेहद शातिराने तरीके से कुछ हो रहा है जिसे समझना जरुरी है!

कहा जाता है कि हर सरकार या शासन की रीड की हड्डी उसका प्रशासन और उस प्रशासन के कर्मचारियों के किये गए काम होते है और उन कर्मचारियों की मेहनत मानी जाती है यही कर्मचारी दिन-रात एक होकर दूसरे खाली पड़े पद के कर्मचारी के हिस्से का काम भी करते है। यही कर्मचारी अपने प्रशासन को थकने हारने नहीं देता है।परन्तु जनपद एटा के प्रशासन में कुछ ऐसा हो रहा है जिसे सुनने के बाद आपको महसूस होगा कि अधिकारी शासन के कामों से अधिक स्थानीय संघठनों की राजनीति में लिप्त होतें जा रहे है।

अभी कुछ दिन पूर्व जलेसर तहसील के प्रकरणो से आप सभी भलीभांति परिचित हुए थे। कैसे तहसील जलेसर SDM के कारनामों से भर गया था।शोरा और खनन के प्रकरण प्रकाश में आये और फिर जिलाधिकारी के निर्देशों पर बड़ी कार्यवाही की गई थी। वरना तहसील जलेसर में भी चुप्पी सधी हुई थी।

तहसील सदर में तहसीलदार संदीप कुमार के कामो और कारनामों से आप अभी तक परिचित नहीं है लेकिन आपको बता दे कि तहसील सदर एटा में संदीप कुमार तहसीलदार द्वारा प्रशासन के कामों में दिलचस्पी से अधिक राजनीति में कदम अधिक बढ़ने लगे है।

पहला प्रकरण
लेखपाल संघ की ब्लॉक अध्यक्ष लेखपाल *कल्पना भदौरिया के निलंबन व स्थानांतरण के प्रकरण को *हवा और आग* दोनों ही तहसीलदार संदीप कुमार द्वारा दी गई थी।जिसमे प्रशासन एटा की हाय तोबा तहसीलदार द्वारा कराई गई थी। समय रहते उक्त प्रकरण में लेखपाल कल्पना भदौरिया पाक साफ निकली।

दूसरा प्रकरण

बरई व बारथर पंचायत पर कार्यरत लेखपाल राजकुमार के निलंबन के मामले में गलत आरोप लगा कर क्षेत्र से हटा दिया गया है। राजकुमार लोधी के सजातीय लेखपालों को ही तैनाती देकर *सजातीय लेखपालों में द्वेष भावना बढ़ाने का काम भी किया जा रहा है. निलंबित *लेखपाल राजकुमार* के निलंबन दिंनाक के महज दो दिन में ही जाँच अधिकारी बदल कर लेखपाल के सजातीय अधिकारी को जाँच अधिकारी बना देना। यह शातिराना कारनामा भी तहसीलदार संदीप कुमार द्वारा रचित किया गया। जबकि नियमानुसार जाँच अधिकारी बदलने के लिए *उच्चाधिकारियो की अनुमति व पीड़ित की तरफ से कोई आरोप लगे कि उक्त प्रकरण मे उक्त अधिकारी द्वारा जाँच निष्पक्ष नहीं होंगी तब जाँच अधिकारी बदला जाता है।लेकिन जाँच अधिकारी बदला गया और जाँच…!! जबकि लेखपाल का निलंबन इसलिए किया गया कि उक्त लेखपाल राजकुमार *तहसीलदार संदीप कुमार* के फोन CALL नहीं उठाते है…. क्या गजब आरोप है!! जबकि इस पुरे निलंबन के खेल में धारा 80 की बंदरबाट का चक्कर है!!!

तीसरा प्रकरण
यह मामला बेहद गंभीर व जटिल है। इस मामले में राजस्व लिपिक अमित कुमार से जुडा हुआ है। इस प्रकरण की प्रकृति में पता किया तो सूत्रों ने बताया कि स्थानांतरण से एक दिन पूर्व अमित कुमार को तहसीलदार संदीप कुमार ने अपने ऑफिस में बुला कर अभद्रता से बातचीत की है. जिसके सापेक्ष में कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने तहसीलदार संदीप कुमार को ऐसा व्यवहार न करने की नसीहत भी दी थी। इसी बात से नाराज होकर तहसीलदार संदीप कुमार राजस्व लिपिक अमित कुमार को उक्त पद से हटा दिया.

अभद्रता के पीछे की कहानी जरूर जाननी चाहिए, अभी हाल ही में राजस्व लिपिक अमित कुमार द्वारा एक कर्मचारी संघ के पदाधिकारी को अपने ऑफिस से लताड़ कर निकाल दिया और अमित कुमार ने कहा कि हम तुमको वोट नहीं देंगे…. अब उक्त पदाधिकारी का उठना बैठना तहसीलदार संदीप कुमार के साथ अधिक है क्योंकि तहसीलदार संदीप कुमार उन्ही को नेता भी मानते है और माफिया भी वही है.

चौथा प्रकरण
अभी हाल ही में अनाज मंडी में लेखपाल के साथ कुछ लोगो ने मारपीट कर दी थी. जिस प्रकरण में तहसीलदार संदीप कुमार द्वारा यह प्रयास भी नहीं किया गया था कि FIR कराई जाये. लेकिन गहन जाँच के उपरांत जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह के हस्तक्षेप के बाद यह FIR कराई गई थी। उक्त विवादित भूमि के गेहूं काटने का समय भी टालने में तहसीलदार संदीप कुमार के हाथ पाव दोनों काम में आये है….!!

यह प्रकरण इसलिए बताये जा रहें है क्योंकि सदर तहसीलदार संदीप कुमार प्रशासनिक कार्यों में ध्यान न देकर राजनीति के कामो में दिलचस्पी लेने लगे है। ऐसा नहीं है कि तहसीलदार सदर पर जनता के काम नहीं हुए है, समय समय पर आये तमाम तहसीलदारों ने जमकर काम किये है और बड़े-बड़े काम किये है लेकिन ऐसा पहली बार तहसील इतिहास में हो रहा है कि कर्मचारियों के चुनाव में तहसीलदार दिलचस्पी लें रहें हो, जो तहसीलदार के चहेते को वोट नहीं देगा उसे हटा दिया जायेगा या इल्जाम लगा कर बाहर तहसील भेज दिया जाये.

समय रहते प्रशासन एटा नहीं चेता तो वो समय भी दूर नहीं है ज़ब कर्मचारी एक तहसीलदार के अधीन होकर शोषित होते रहेंगे और इस जनपद को बंजर करने का काम किया जायेगा.

सूत्र यह भी बताते है कि तहसीलदार सदर संदीप कुमार द्वारा जिलाधिकारी के आवास के नाम के चंदे के पन्ने भी खोले जायेगे क्योंकि सब साफ दिखना चाहिए, धुंधला दिखने से आंखे खराब हो जाती है या फिर तानाशाही हावी हो जाती है?.

अगले अंक में… इंतजार कीजिये!!

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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