उत्तर प्रदेश में चल रहे राजनैतिक प्रयोगों का विश्लेषण

उत्तर प्रदेश में चल रहे राजनैतिक प्रयोगों का विश्लेषण

सभी राजनैतिक दल जनता की भलाई सेवा और सुरक्षा का वादा करके जनता से वोट मांगते हैं लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य जनता को भ्रमित कर सत्ता प्राप्त करना होता है।
यह बात अलग है कि सभी राजनैतिक दलों के नेता जनता की सेवा करते-करते करोड़पति , अरबपति और खरबपति हो जाते हैं , कोई व्यक्ति उन पर उंगली न उठा सके इसलिए सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए चार्टर्ड अकाउंटटेंट रखते हुए काले धन को गोरा धन बना लेते हैं और समाज में साफ सुथरे बने रहते हैं ।

भारतीय जनता पार्टी और उसकी भविष्य की योजना

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी 400 पार का दावा कर रही थी लेकिन 300 के भी भीतर सिमट गई। भाजपा अब इसे विपक्ष की चालाकी और दुष्प्रचार का परिणाम बता रही है लेकिन झूठी बातें उड़ाने में तो भाजपा के लोग भी पीछे नहीं रहे ।

सूत्रों की मानें तो…

संघ और भाजपा का शीर्ष नेतृत्व योगी आदित्यनाथ को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना उनके नेतृत्व में 2029 का लोकसभा चुनाव लड़ना चाहता है , जिससे योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता को भुनाकर अधिक से अधिक सीटें प्राप्त कर भाजपा लगातार चौथी बार केंद्र की सत्ता पर स्थापित रहे ।

योगी के बाद कौन…..?

यदि योगी आदित्यनाथ को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया तो उनके स्थान पर केशव प्रसाद मौर्य को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है , साथ ही साथ समाज के सभी वर्गों में समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में किसी दलित चेहरे को लाया जा सकता है ।

सपा का नया राजनैतिक प्रयोग

समाजवादी पार्टी इन दोनों एक नए राजनीतिक प्रयोग को कर रही है ।

सपा को परंपरागत मुस्लिम यादव वोटर का वोट दशकों से मिल रहा है लेकिन अब यह समीकरण सत्ता तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त नहीं है , अब इसमें अन्य जातियों को भी जोड़ना पड़ेगा ।

कुछ महीने में समाजवादी पार्टी के दो नेताओं के बयानों से बवाल मच गया , विवादित बयान के लिए दोनों नेताओं का चुनाव बड़ी बुद्धिमानी से किया गया है , जो चुनावों को प्रभावित कर सके।
पहले अबू आजमी और दूसरे रामजीलाल सुमन , जबकि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के परिवार में 5 लोकसभा सांसद हैं और 1 राज्यसभा सांसद हैं , उनमें से कोई भी व्यक्ति बयान दे सकता था लेकिन सैफई परिवार के किसी सदस्य द्वारा ये बयान दिए जाते तो सड़कों पर इतना बवाल न मचता , क्योंकि सैफई में किसी तरह का बबाल मचाना संभव नहीं है, जैसा आगरा में मचा है ।

अबू आजमी मुसलमान हैं और रामजीलाल सुमन दलित वर्ग से आते हैं, अब इन दोनों के विवादित बयान देने के कारण दोनों नेताओं का विरोध बीजेपी और उससे जुड़े संगठन कर रहे हैं , और समाजवादी पार्टी व उसके प्रवक्ता मुसलमानों और दलितों का वोट लेने के लिए यह सिद्ध करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे कि भाजपा मुसलमानों और दलितों की विरोधी व सपा दोनों वर्गों की परम हितैषी है , जबकि विवादित बयानों पर विरोध व्यक्ति विशेष का हो रहा है किसी जाति विशेष का नहीं ।

यह मामला यदि शीघ्र समाप्त न हुआ तो भविष्य में जातीय संघर्ष का रूप ले सकता है। इस मामले का बीज सपा नेताओं की ओर से बोया गया है तो अब इस विवाद को खाद पानी देकर बड़ा वृक्ष भाजपा समर्थक बना रहे हैं।

दूध की धुली नहीं है भाजपा

भारतीय जनता पार्टी जिस तरह से स्वयं को राजनीतिक रूप से साफ स्वच्छ दिखती है हकीकत उसके ठीक उल्टी है। विपक्ष के जिन नेताओं को भाजपा के प्रवक्ता दिन-रात भ्रष्ट और माफिया बताते थे , वे सभी नेता भाजपा में शामिल होकर निरपराध और मासूम बन गए हैं। ऐसे नेताओं में जिला पंचायत सदस्य से लेकर ब्लॉक प्रमुख , विधायक और सांसद तक शामिल है जो पहले भ्रष्ट बताए जाते हैं लेकिन अब भाजपाई हैं और अब उनमें कोई कमी नहीं है।

उत्तर प्रदेश से माफियाओं का सफाया किया जा रहा है लेकिन सजातीय माफियाओं को क्यों छोड़ा जा रहा है ?

इस बात का सही जवाब कोई नहीं दे सकता क्योंकि इसका सही जवाब सब जानते हैं बस बोलने से बचते हैं।

किसी भी जिले की तहसील से लेकर मुख्यालय तक भ्रष्टाचार के मामले रोज खुल रहे हैं , और रोज रिश्वतखोरी के नए-नए वीडियो वायरल हो रहे हैं ।
सत्ताधारी पार्टी भाजपा के विधायक की अपनी जान की सुरक्षा को लेकर सड़कों पर लेट जाते हैं इससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि प्रदेश में क्या चल रहा है । नौकरशाही पूरी तरह सरकार पर हावी है , नौकरशाह अपने चश्मे से सरकार को सपने दिखा रहे हैं और बता रहे हैं कि 2027 में उत्तर प्रदेश में भाजपा ही आएगी।
सपा पर जिन आरोपों को लगाकर भाजपा सत्ता में आई थी क्या आज वह काम बंद हो गए ?

क्या बीफ एक्सपोर्ट बंद हो गया ?

क्या लोगों पर झूठे मुकदमे लगने बंद हो गए ?

क्या जमीनों पर कब्जे नहीं हो रहे हैं ?

क्या अवैध खनन बंद हो गया ?

काम सब हो रहे हैं लेकिन बस स्वरूप बदल दिया गया है ।

बनते सब हैं हरिश्चंद्र पर हकीकत पर रहते हैं चुप

भारतीय जनता पार्टी के नेताओं व प्रवक्ताओं से जब कोई व्यक्ति उनकी सरकार की कमियों पर सवाल करता है या बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था पर प्रश्न पूछता है तो जवाब देते हुए वह पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी की सरकार को दोषी बताते हुए शुरू होते हैं और अंत में पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था का उदाहरण देने लगते हैं , लेकिन अपनी कमियों को कभी नहीं स्वीकारते । प्रदेश को माफिया मुक्त बनाने की बात कहते हैं लेकिन सरकार में माननीय बने हुए सजातीय माफियाओं के सफाए के लिए कुछ नहीं करते , करना तो बहुत बड़ी बात है कुछ बोलते भी नहीं।

समाजवादी पार्टी के नेता और प्रवक्ताओं की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। समाजवादी पार्टी के नेताओं और प्रवक्ताओं को उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार से लेकर मध्यप्रदेश हरियाणा व राजस्थान के साथ साथ बीसीसीआई तक हर कमी व दोष दिखाई देता है और उस पर खुलकर बोलते हैं लेकिन पश्चिम बंगाल में सड़कों पर हो रही खुली गुंडागर्दी और बंगाल पुलिस की चुप्पी पर पर कभी अपना विरोध नहीं जताते।

निष्कर्ष

राजनीतिक दलों की एक अपनी सोच होती है जो केवल उन्हें सत्ता तक पहुंचाने के लिए प्रयोग की जाती है ।
भाजपा हो या सपा हो कांग्रेस हो या बसपा सभी केवल उसी विषय/मुद्दे का विरोध करते हैं जिससे इन्हें राजनीतिक रूप से वोटो का लाभ हो रहा हो । नेताओं की सबसे बड़ी विशेषता होती है कि अपने को ईमानदार और सामने वाले को भ्रष्ट बताते हैं।

अभी हाल ही में खुलासा हुआ है कि किस तरह से टोटी चोर और आलू से सोना बनाने वाली मशीन के झूठे मुद्दे को किस तरह से प्रचारित किया गया
और ठीक ऐसे ही अमित शाह के आरक्षण खत्म कर देने वाले बयान को झूठा प्रचारित किया गया।

जनता को यह समझना होगा कि नेता किसी का न होता।

पवन चतुर्वेदी
डिविजनल ब्यूरो चीफ

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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