

बीते दिनों से देश में राजपूत शिरोमणि मेवाड़ के महान शासक महाराणा सांगा और हिन्दुओं को गद्दार कहने का एक अभियान चला हुआ है जिसमें कुछ स्वार्थी राजनैतिक दल भी शामिल हो चुके हैं। यह अभियान हाल-फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। इसकी शुरूआत सपा के आगरा के बहुचर्चित सांसद रामजीलाल सुमन ने की थी। दुख इस बात का है कि ऐसा घृणित आरोप लगाने से पहले आरोप लगाने वालों ने भरतपुर के पास खानवा के मैदान में जो अब मिश्रित आबादी वाला खानुआं गांव बन चुका है, की ऊंची पहाडी़ पर बने स्मारक पर जाकर देख लिया होता। यह कहना है वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं जाने-माने पर्यावरणविद ज्ञानेन्द्र रावत का। उनका कहना है कि यह स्मारक जहां राणा सांगा की मूर्ति के एक ओर चंदेली राजा मेदिनी राय की मूर्ति है तो दूसरी ओर इस्लाम के नाम पर राष्ट्र के खिलाफ बाबर का संधि प्रस्ताव ठुकराने वाले हसन खान मेवाती की मूर्ति है। यह स्मारक राणा सांगा के बुलंद साहस और राष्ट्र भक्ति का जीता जागता सबूत है। जहां काले पत्थर पर अंकित है खानवा गीत, ‘स्वतंत्र समर का साक्षी, मैं खानवा गांव बोलता हूं’ से शुरू गीत राणा के शौर्य की कहानी कह रहा है। दुख है राणा और हिन्दुओं को गद्दार कहने से पहले आरोप लगाने वाले भरतपुर जाकर अरावली की पहाड़ी में बने इस स्मारक पर जाने की जहमत उठा लेते। वहां के मुस्लिम इससे बेहद नाराज हैं और उनका कहना है कि सांसद रामजीलाल सुमन को अपना बयान वापस लेना चाहिए अन्यथा सबूत दें। अब अहम सवाल तो यह है कि राणा सांगा और हिन्दुओं को गद्दार बताने वाले खुद बतायें कि वह किनकी औलाद हैं। राणा सांगा और हिन्दुओं को यह बताने की जरूरत नहीं है कि वे कौन हैं और किनकी औलाद हैं।