
एटा,उत्तर प्रदेश में एक बात आम हो चुकी है कि जनप्रतिनिधि की बात प्रशासन नहीं सुन रहा है। ऐसा कभी- कभी सोशल मिडिया में चिल्लाते हुए विधायकगण दिखाई दे जाते है.या फिर विधायक का कुर्ता फट जाता है लेकिन ऐसा सच सा लगने लगा है।क्योंकि एटा में भी ऐसा ही कुछ हुआ होगा तभी तो….!!
मारहरा विधानसभा एटा जनपद के विधायक वीरेंद्र लोधी द्वारा ग्राम पंचायत बादामपुर भदवास के एक मामले को लेकर ज़ब प्रशासन एटा सदर तहसीलदार संदीप कुमार व SDM जगमोहन गुप्ता द्वारा नहीं समझा गया तब यह मामला विधायक वीरेंद्र लोधी द्वारा विधानसभा सभापति की प्राककलन समिति की बैठक के दौरान शिकायती पत्र दिया गया है। जिसमे फर्जी पट्टे होने के कई बड़े सबूत दिए गए है. जिन पट्टों की स्थानीय जिला स्तर पर जाँच होनी चाहिए थी व उक्त भूमि को प्रशासन को कब्जे में लेना चाहिए था।परन्तु उक्त भूमाफियाओ पर किसी भी तरह की कार्यवाही न करके मामले को दबा दिया गया होगा। फिलहाल शासन से इस संबंध में एटा जनपद प्रशासन से जवाब माँगा गया है।
मामला विधायक ने समझा और लखनऊ तक लें गए ?
मामले को मारहरा विधायक ने समझा और पट्टा पत्रावली के साथ विधायक मारहरा वीरेंद्र लोधी के पत्र सहित उक्त प्रकरण की जाँच शासकीय रास्ते से होते हुए एटा आ चुकी है.
शिकायतकर्ता का कहना है कि उक्त भूमि पर 1975-76 में पट्टे हो चुके थे तो हवा हवाई में पुनः उसी गाटा संख्या पर पुनः पट्टे कैसे हो सकते है। शिकायतकर्ता की शिकायत में यह तो दम है कि ज़ब 1975 में पट्टे हो चुके है तो लेखपाल ने पुनः पट्टे कर कैसे कर दिए।शिकायतकर्ता का कहना है कि यादव वर्ग के लोगो को लेखपाल द्वारा लाभ दिया गया है।यह भी जाँच होनी चाहिए कि यह कैसे सम्भव है।
विधायक के पत्र का सज्ञान!! राजस्व प्रमुख सचिव पी.गुरुप्रसाद द्वारा लिया गया है. प्रथम दृष्टा पुरे मामले में कीमती जमीन होने की वजह से पट्टे होने में कमी भी है क्योंकि पट्टा पत्रावली बनी ही नहीं है… हवा में सारे गाटा दर्ज किये गए है।ऐसा शिकायत कर्ता द्वारा अपने पत्र में दर्ज शिकायत दर्ज की है।
मामले की गंभीरता कितनी है ?
मामला 11/7/2024 से शासन से चला है अभी तक उक्त मामले में एटा तहसील से कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई है. क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का डर तहसीलदार संदीप कुमार को नहीं लगता है।चुंकि शिकायते होती रहती है. ऐसे पत्र विधायक देते रहते है….. खैर….. देखते है शासन के निर्देशों का पालन किस करवट बैठता है।क्योंकि 2025 में सांतवा माह भी आने वाला है।
ऐसे ही कुछ अन्य मामलो को लेकर आने वाले है कि एटा सदर तहसीलदार संदीप कुमार की देखरेख में कहा-कहा सरकारी भूमियो पर अवैध कब्जे है। करोङो की जमीन पर भू माफियाओ का कब्जा कैसे हो सकता है ज़ब तक सदर तहसील के अधिकारी लिप्त न हो। क्योंकि साहब पैसा किसको बुरा लगता है……!!