
अभिषेक प्रकाश ने बरेली और लखीमपुर डीएम रहते भी जमकर लूट मचाई थी।
सांसद वीरेंद्र सिंह की चिट्ठी पर DoPT ने जाँच के लिए यूपी के नियुक्ति विभाग को पत्र लिखा था…मुख्यमंत्री ने जांच की संस्तुति भी कर दी मगर ब्यूरोक्रेसी के घाघ अफसरों ने जांच दबा दी।
ACS रेणुका कुमार से जांच के आदेश की चिट्ठी ACS तक पहुँची ही नहीं, नियुक्ति विभाग के तत्कालीन विशेषसचिव जो मौजूदा समय में तराई के ज़िले में कलेक्टर बनकर “तर माल” खा रहे हैं, उन्होंने जातिय अस्मिता के नाम पर “सर जाँच अधिकारी बदलवा लीजिए, हम तब तक चिट्ठी दबाए हुए हैं, अपनी भक्ति दिखा दी।
सरकार की आँखों के तारे अभिषेक प्रकाश ने तगड़े जुगाड़ (पंचम तल) से आलोक सिन्हा को जाँच अधिकारी नामित करवा लिया।
लखीमपुर में 300 बीघा और बरेली में 400 बीघे जमीन ख़रीद मामले में जिसमें बरेली ज़िलाधिकारी ने फाइल पर साफ लिखा था कि “मामला अति संवेदनशील और गम्भीर प्रवृति का है और स्टाम्प चोरी के साथ राजस्व से भी जुड़ा हुआ है।
नए जाँच अधिकारी ने रिपोर्ट के आख़िर में लिखा कि अभिषेक के पिता ख्यातिलब्ध प्रतिष्ठित चिकित्सक हैं। अतएवं …
विभागीय लोगों का कहना है कि “खाद-पानी” डालकर मामले को दाखिल दफ़्तर कर दिया था जांच अधिकारी ACS ने
लेकिन ACS साहब ये प्रतिष्ठित ख्यातिलब्ध चिकित्सक पिता अपने बेटे के जिला कलेक्टर रहने के दौरान ही 2012-2014 तक सैकड़ों बीघा जमीन कैसे ख़रीद पाए?
ना उसके पहले और ना बाद में…
योगी जी 2500 करोड़ की जमीन धांधली की जांच किसी ईमानदार एजेंसी से करवाएँगे आप या यूँ ही धृतराष्ट्र बने रहेंगे!!
प्रकाश जी की देखा देखी एक नए ias साहेबान के चर्चे भी इन दिनों यूपी के एक खास शहर के बाशिंदों की जुबान पर है