आखिर कब खुलेगा राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय

*आखिर कब खुलेगा राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय* *- बर्षो से बंद, तैनात फार्मासिस्ट को नही है अपने निजी क्लीनिक से फुरसत* *कुरावली/मनपुरी।* विकास खंड के ग्राम सोनई स्थित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय हर समय बंद रहता है। ग्रामीणों की मांने तो हॉस्पीटल दो बर्षो से तो लगातार ही बंद है हां इतना जरुर है महीने में एक दिन के लिए सरकारी दवाई निकालने और रजिस्टर पर अंकित करने के लिए खुलता है। राजकीय होम्योपथिक चिकित्सालय पर तैनात फार्मासिट और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को हॉस्पीटल में बैठने के लिए फुरसत नही है। सूत्रो की मांने तो तैनात फार्मासिस्ट कस्वा के मोहल्ला पठानान में निजी क्लीनिक संचालित करता है जिसे अपने क्लीनिक से ही फुरसत नही मिलती है। सरकार से प्राप्त होने वाली सैलरी उसके लिए हर महीने क्लीनिक संचालित करने के लिए मुफ्त में ही मिल जाती है। इस हॉस्पीटल का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की अपराधी किस्म के व्यक्ति से कम नही है जिसे इलका में गुण्डागर्दी फैलाने से फुरसत ही नही है। एक तरफ सरकार ग्रामीण इलाको में स्वास्थ्य सेवाओ को बेहतर करने पर जोर दे रही है। लेकिन क्षेत्र के ग्राम सोनई स्थित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय बर्षो से बंद ही रहता है। तीन दिन पूर्व कुछ समाचार पत्रो द्वारा हॉस्पीटल की हकीकत हो समाचार पत्रों में प्रकाशित किया था। उसी दिन हॉस्पीटल दो घंटे के लिए खोला गया। हॉस्पीटल के सामने खड़ी हुई बड़ी बड़ी घास को कटवा दिया गया। उसके बाद हॉस्पीटल को फिर से बंद कर दिया गया। तब से लेकर आज तक हॉस्पीटल बंद है। गुरुवार की दोपहर हॉस्पीटल की व्यवस्थाओ का जायजा लिया गया तब वहां पर ग्रामीण भी एकत्र हो गए। ग्रामीणों के द्वारा जानकारी दी गई कि हॉस्पीटल बर्षो से बंद है। पिछले समय में एक दो दिन के लिए खुल जाता था अब दो साल से तो पूरी तरह ही बंद है। ग्रामीण बताते है कि उन्हे बीमार होने पर दवाई लेने के लिए यहां से 7 -8 किलोमीटर दूर जाना है। या फिर प्राइवेट डाक्टर से दवाई लेनी पड़ती है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की कि राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल पर पुराने स्टाफ को हटाकर नवीन स्टाफ तैनात कराने की मांग की है। जिससे उन्हे स्वास्थ्य सुविधाओ का लाभ मिल सके। इस संबंध में जब जिला होम्योपैथी अधिकारी डॉ. शमीम अंसारी से वार्ता करने की कोशिश की गई तो उन्होने तीन घंटे में भी फोन उठाना उचित नही समक्षा।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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