
यह एक मराठी कहावत है। आंवला तो सब को पता होता ही है, और अधिकतर हिन्दी भाषी कोहड़ा भी जानते पहचानते हैं। बाकी जिनकी भाषा में कोहड़ा को किसी और नाम हो या जिनको कोहड़ा नहीं बल्कि Ash Gourd ही पता हो उन सब के लिए तुलनात्मक फोटो ही लगाया है। आशा है बात स्पष्ट हुई होगी।
तो बात उस मराठी कहावत की है। अभिप्राय यह है कि आंवला देनेवाला बड़ी धूर्तता से अपने आंवले का ऐसा गुणगान करेगा या उस समय का जब उसने आंवला दिया था कि उसके सामने उसका आंवले से कई गुना बड़ा कोहड़ा मांगना छोटी बात लगे। अब बात कोहड़ेवाले की है कि वो इन धूर्तों की बातों में आता है या नहीं।
दिल्ली में या उत्तर प्रदेश में भायजानों का भाजपा को वोट देने की बात को जिस तरह हवा दी जा रही है, सोचा इस मराठी कहावत का सचित्र परिचय सब को करा दूँ यह उचित रहेगा।
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