
पौराणिक नगरी में धर्म , आस्था और मनोरंजन की बह रही बयार, रिपोर्ट निशा कांत शर्मा
सोरों जी ऐतिहासिक एवं पौराणिक नगरी ,संत तुलसीदास की जन्मस्थली , महाराज भागीरथ की तप स्थली आदि गंगा का उद्गम स्थल , आजकल धर्म-कर्म , आस्था तथा मनोरंजन में सराबोर दिखाई देती है जहां सुदूर अंचलों से एवं राजस्थान मध्य प्रदेश से भी श्रृद्धालु पहुंच रहे हैं।
एक ओर जहां अनादि काल से प्रतिवर्ष मार्गशीर्ष मास में लगने वाला प्रान्तीय में अपनी छटा बखेर रहा है और लक्खी मेले के नाम से विख्यात है , इस मेले में ग्रामीण से शहरी अंचलों के लोगों की जरुरतों के अनुसार पशुओं से लेकर दैनिक उपयोग की वस्तुएं मिलती है और व्यवसायियों एवं स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध होता है वहीं मोक्षदा एकादशी पर्व पर लाखों की संख्या में पंचकोसी परिक्रमा में श्रृद्धालुओं ने भाग लेकर जनपद में एक रिकार्ड बना दिया।
कहा जाता है कि एकादशी पर पंच कोसी परिक्रमा लगाने से व्यक्ति को सांसारिक आवागमन से मुक्ति मिल जाती है। यह भी कहा जाता है कि कि भगवान विष्णु के तृतीय अवतार भगवान वाराह ने अत्यंत पापी राक्षस हिरण्याक्ष कावध करके आदि गंगा में स्नान कर एकादशी को आदि गंगा की पंचकोसी परिक्रमा कर द्वादशी को देह त्याग किया था और तब से ही पंचकोसी परिक्रमा और मेला मार्ग शीर्ष का आयोजन होता आ रहा है कल मोक्षदा एकादशी के अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद , बजरंग दल , राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ , गंगा वाराह महासभा , अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा , तथा सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से लाखों की तादाद में श्रृद्धालुओं ने पंच कोसी परिक्रमा की , गंगा सभा के महामंत्री ओम दर्शन शर्मा द्वारा भगवान वाराह मंदिर में 56 भोग दर्शन एवं प्रसाद वितरण और चौरासी घंटे वाली माता मंदिर पर प्रातः 09 बजे प्रसाद वितरण तथा वराह मंदिर हरकी पौड़ी पर भंडारे का आयोजन किया गया अन्य सामाजिक संस्थाओं के द्वारा भी आवश्यक सेवाएं प्रदान की गई आज कैलाश मठ के महामंडलेश्वर ने किया शाही स्नान और भगवान वाराह का खजाना लुटाया।