
एटा, जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह के द्वारा दिये गए गए निर्देशों के क्रम में जिला कृषि अधिकारी ने किसान भाइयों को अवगत कराया है कि फसलों की बुबाई हेतु सन्तुलित उर्वरकों के प्रयोग तथा फसल के अच्छे उत्पादन हेतु नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश का अनुपात 4:2:1 होना चाहिए। जनपद में यह अनुपात 28:91 है। यह अनुपात प्रदर्शित करता है कि प्रदेश के किसान खेती के लिए बुबाई के समय अधिकांशतः यूरिया, डी०ए०पी० का प्रयोग करते हैं। मुख्य पोषक तत्त्वों की पूर्ति हेतु एन०पी०के० (12:32:16, 10:26:26) जैसे मिश्रित उर्वरकों के प्रयोग से फसलों में सन्तुलित मात्रा में पोषक तत्वों की पूर्ति हो जाती है, जिसका सकारात्मक प्रभाव फसल उत्पादन व उपज की गुणवत्ता बृद्धि पर पडेगा।
रबी सीजन की विभिन्न फसलें जैसे चना, मटर, मसूर, गेंहूँ, सरसों तथा आलू की बुबाई के समय फास्फेटिक उर्वरकों की आवश्यकता पडती है। वर्तमान में फास्फेटिक उर्वरकों के कई विकल्प किसान भाईयों के लिए उपलब्ध है, जैसे डी०ए०पी०, टी०एस०पी०। डी०ए०पी० में दो पोषक तत्व नत्रजन एवं फास्फोरस उपलब्ध होते है। एन०पी०के० के विभिन्न ग्रेड के कामप्लेक्स फर्टिलाइजर्स में सन्तुलित रूप से नत्रजन, फास्फोरस एवं पोटैशियम तीनों अत्यन्त महत्वपूर्ण प्राथमिक पोषक तत्वों की उपलब्धता हो जाती है। आलू जैसे महत्वपूर्ण कामिर्शियल फसल के लिए सन्तुलित उर्वरक, विशेष रूप से पोटाश की उत्पादन एवं गुणवत्ता हेतु महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
इसी प्रकार फास्फोरस के दूसरे महत्वपूर्ण उर्वरक एस०एस०पी० जिसमें 16 प्रतिशत फास्फोरस एवं 11 प्रतिशत सल्फर के साथ कैल्शियम की प्रचुर मात्रा पायी जाती है। यह उर्वरक सरसों जैसे तिलहनी फसलों के उत्पादन हेतु अत्यन्त महत्वपूर्ण है। सरसों के तेल के प्रतिशत में बढ़ोत्तरी हेतु सल्फर की आवश्यकता होती है। दलहनी फसलों के लिए एन०पी०के० एवं एस०एस०पी० जैसे उर्वरक डी०ए०पी० की तुलना में Cost-effective सन्तुलित है। जानकारी के अभाव में प्रायः किसान भाई केवल डी०ए०पी० के प्रयोग के लिए आतुर होते हैं। असन्तुलित मात्रा में उर्वरकों के प्रयोग से लागत में वृद्धि होती है तथा उर्वरा क्षमता में कमी के साथ पर्यावरण प्रदूषण की समस्या में वृद्धि होती है। रबी फसलों में सन्तुलित उर्वरक उपयोग करने से फसल उत्पादकता व गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ अनेक फायदे जैसे गेंहूँ के दाने मोटे एवं चमकदार, सरसों में तेल की मात्रा में वृद्धि, कीट य रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।
उन्होंने कहा कि कृषक भाई अपनी कृषि भूमि का मृदा परीक्षण करा ले और परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही फसल / भूमि की आवश्यकता के अनुरूप संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें। किसी प्रकार की समस्या होने पर जिला कृषि अधिकारी, एटा के मोबाइल नम्बर 9918120606 अथवा अपर जिला कृषि अधिकारी, एटा के मोबाइल नम्बर 8318595504 पर सम्पर्क कर सकते है।