कब बदलेंगे हम, शादी में गन्ने जितना खर्च करने लगे हैं

आज शहर के जैन समुदाय ने पिछले रविवार को एक अच्छा निर्णय लिया कि यदि किसी भी जैन समुदाय की शादी में 6 से अधिक व्यंजन हैं, तो उस शादी में दूल्हा और दुल्हन को केवल आशीर्वाद दिया जाना चाहिए, लेकिन खाया नहीं जाएगा, और फिर कल इसका पालन किया जाएगा। अग्रवाल समाज ने भी उक्त निर्णय को लागू करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही शादी के कार्ड न छपवाकर केवल व्हाट्सएप और फोन के जरिए ही निमंत्रण दें
विशेष निर्णय यह है कि विवाह पूर्व और संगीत कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है
उपरोक्त दोनों समाज (जैन और अग्रवाल) आर्थिक रूप से मजबूत हैं लेकिन उन्होंने उपरोक्त निर्णय लिया, दोनों समाजों को बधाई *कब बदलेंगे हम, शादी में गन्ने जितना खर्च करने लगे हैं हम, शादी की खुशियां मनाने के लिए कभी-कभी कर्ज भी लेते हैं, अब हमें जरूर बदलना होगा।*

नोट:- अनुकरणीय एवं आदर्श निर्णय का हृदय से स्वागत है। और सभी जाति, धर्म और पंथ इस निर्णय का पालन करें

समाज को विवाह संस्कार को विवाह संस्कार में बदलना चाहिए।

कुछ दिन पहले कोरोना वायरस के कारण सरकार ने शादियों और कार्यक्रमों में उपस्थिति सीमित कर दी थी, लेकिन लोग इसे भूल गए और लाखों रुपये खर्च करने लगे।
हम अनावश्यक रूप से लाखों रुपये बर्बाद कर रहे हैं और कर्ज में डूब रहे हैं। हमें अब बदलना होगा। वरना वक्त तुम्हें माफ नहीं करेगा.

1)कृषि आय दिन-ब-दिन घटती जा रही है।
2)कृषि उपज की कोई कीमत नहीं होती।
3) अब कोई सरकारी नौकरी नहीं।
4)निजी रोजगार में कोई गारंटी नहीं है।
5)लड़की की शादी में 100 रुपये का खर्च होता है, जबकि लड़के की शादी में भी 80 रुपये का खर्च होता है।
6) कर्ज में जन्मा, कर्ज में ही बड़ा हुआ और कर्ज में ही मर गया, कुछ पीढ़ियाँ बीत गईं।
7) विवाह एक समारोह नहीं बल्कि एक ‘संस्कार’ है। 16 संस्कारों में से एक संस्कार समझना चाहिए।
8)चाहे कितनी भी बड़ी शादी क्यों न हो, लोग उसे भूल जाते हैं। इतनी बड़ी शादी करने पर आज तक किसी को पुरस्कार नहीं मिला।
9) हम खेत बेचकर गुंठा आ गए, जबकि व्यापारी एक दुकान से चार दुकानें चला रहा है। व्यापारी वर्ग का नाम लेने के बजाय उनके अर्थशास्त्र को समझना चाहिए।
10)ईर्ष्या नहीं बल्कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए।
11)भाईचारे में घातक प्रतिस्पर्धा की कोई आवश्यकता नहीं है। शादी के मौके पर ऐसा नहीं चाहिए.
12) दूल्हा-दुल्हन को हमेशा उपयोगी पोशाक पहननी चाहिए।
13) वर्मई को भी शोर नहीं करना चाहिए। हमारी एक बेटी भी है. बहू आपकी बेटी है जो कल आपका ख्याल रखेगी. यह भावना जड़ पकड़नी चाहिए।
14) खाने-पीने का तरीका बंद करें और खर्च कम करें और वर-वधू की भविष्य की प्रगति में योगदान दें।
15) ऐसे बर्तन/फर्नीचर नहीं चाहिए जो दुनिया में कभी काम न आएं।
16) हल्दी के कार्यक्रम में मेहंदी, वैदिक विधि, भीड़ से बचना चाहिए। स्वागत समारोह में सादगी लानी चाहिए।
17) क्रिकेट 5-दिवसीय, वनडे से 20-20 हो गया। तो हम शादी को छोटा/प्रबंधनीय क्यों बनाते हैं?
18) केवल कुछ लोग ही सभी मेहमानों के साथ आराम से बातचीत कर सकते हैं।
19) शादी के कार्ड की कीमत पढ़ें और शादी का कार्ड व्हाट्सएप के माध्यम से भेजें और कार्ड भेजने के बाद संबंधित व्यक्ति को फोन करके जिद करने के लिए आमंत्रित करें, शादी से दो दिन पहले दोबारा याद दिलाने के लिए फोन करें।
20) किसी भी जाति और धर्म की अच्छी बातें स्वीकार करनी चाहिए।

21)समाज को बेहतर बनाने के लिए सभी को एक कदम आगे बढ़ाना चाहिए।
आइये सुधारों की शुरुआत स्वयं से करें! धीरे-धीरे पूरा समाज बदल जाएगा और एक दिन समाज 100% प्रगति करेगा!

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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