एक्सपोज हो गया भारतीय जनता पार्टी का खेल?

क्या एक्सपोज हो गया भारतीय जनता पार्टी का खेल

केजरीवाल का खुलासा और राजीव कुमार की मुसीबत

कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल जब 2 दिन पहले राजीव कुमार से मिला था और जो गंभीर तथ्य उनके सामने उसने रखे थे। आज केजरीवाल ने दिल्ली मे लगभग उन्हें तथ्यों की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा किया है! केजरीवाल ने बताया कि शाहदरा विधानसभा में 11000 वोट कम करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। यानी फॉर्म 7 भरा है और फॉर्म 7 भरने वाले लोग भारतीय जनता पार्टी के लेटर पैड पर कुछ ही लोग यह कार्यवाही कर रहे हैं। आश्चर्य है, भारतीय चुनाव आयोग बिना जांच किये किसी पार्टी विशेष के पदाधिकारी के द्वारा फॉर्म भरने के बाद हजारों वोट कम कर देता है!

कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने जो आरोप लगाया था उसको स्पष्ट करते हुए गुरमीत सबर ने कहा था कि, हमने महाराष्ट्र में जो नाम हटाए गए हैं और जो नाम बढ़ाये गए हैं उनके प्रमाण मांगे है! गुरमीत जी ने एक वक्तव्य में कहा की महाराष्ट्र के तसवार गांव में जब एक साथ 1000 वोट बढाय गए तो वहां के तहसीलदार ने उसकी जांच की और जांच में पाया के यह सब गलत तरीके से किया जा रहा है। क्योंकि उनकी किसी भी प्रकार से जांच नहीं की गई थी! उन में दर्ज लोगों के नाम झूठे थे और झूठे आधार कार्ड लगाए हुए थे! और फॉर्म 7 भरने वाले कुछ चुनिंदा लोग ही थे जिन्होंने इतनी बड़ी मात्रा में नाम बढ़ाने के प्रस्ताव दिए थे!

कांग्रेस के प्रवक्ता का कहना था हमारे द्वारा आपत्ति दर्ज करने के बावजूद भी चुनाव आयोग ने इस संदर्भ में गंभीरता से काम नहीं किया! यह सच है कि कांग्रेस का संगीनिक ढांचा भी इसकी लापरवाही का जिम्मेदार है, लेकिन प्रारंभिक रूप से चुनाव आयोग का कर्तव्य बनता है कि वह सब तत्वों की जांच करें! कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल का आरोप था ऐसे 47 लाख वोट महाराष्ट्र में बढा दिये गए और जिन विधानसभा में 10000 या इससे ज्यादा वोट बनाए गए उन 110 विधानसभा क्षेत्र में से 102 विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी जीती है!

इसके साथ ही कांग्रेस प्रतीनिधि मंडल ने बिना आधार के वोट हटाने का मामला भी चुनाव आयोग के संज्ञान में लाया था। उनका कहना था प्रति विधानसभा 10000 वोट हटाए भी गए, जिनका कोई आधार नहीं था या शिफ्ट कर दिए गए। मतलब उनके मतदाता बूथ बदल दिए गए 5 महीने पहले ग्रामीण लोगों ने लोकसभा में वोट डाले थे। वह इसी भरोसे थे कि उनका बूथ पुराना ही रहेगा लेकिन बूथ बदलने की वजह से वह वोट डालने से वंचित रहे और बूथ बदलने का कोई वाजिब कारण नहीं था!

महाराष्ट्र में यह संख्या 3,75 लाख थी, लेकिन शिफ्टिंग वोटो की संख्या बताने में चुनाव आयोग असमर्थ था! चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र में माना के 39 लाख वोट बड़े हैं, जबकि महाराष्ट्र राज्य के चुनाव आयोग की वेबसाइट पर यह 47 लाख वोट बड़े हुए बताया जा रहा है! दिल्ली में भी लगभग यही दोहराया जा रहा है और यही आरोप अरविंद केजरीवाल ने लगाए हैं तो उसे एक बात तो स्पष्ट हो गई है, खेल का पहला हिस्सा अपने समर्थित वोटो को बढ़ाना और सामने वालों के वोटो को हटाना है!

वैसा सभी राजनीतिक दल इस प्रकार की कोशिश करते हैं लेकिन जिस mesiv तरीके से इसको अंजाम दिया गया है, वह निश्चित रूप से डराने वाला है और चुनाव आयोग के प्रति और प्रणाली के प्रति अ विश्वास का कारण भी और महाराष्ट्र में जिन मशीनों से चुनाव हुआ था उनसे डाटा इरेज करने को लेकर भी संभावनाओं का एक खुलासा वोट फॉर डेमोक्रेसी की एक रिपोर्ट में हुआ है! जिसमें उन्होंने माना है की मशीन हैक नहीं हो सकती, लेकिन क्योंकि उसमें वन टाइम प्रोग्रामिंग होती है इसलिए आयोग की मिली भगत से सरकार अपने पक्ष में वह प्रोग्रामिंग कर सकती है और प्रोग्रामिंग में मॉक पोल के बाद की प्रोग्रामिंग की जाती है। ताकि मॉक पोल के समय वह पकड़ी नहीं जा सके!

इसके पीछे एक तर्क भी है की इन वोटिंग मशीनों का निर्माण भारत सरकार की कंपनियां एलेक्ट्रोनिक्स कंप्यूटर इंस्टिट्यूट, एवं भारत लिमिटेड द्वारा किया जाता है और इन दोनों कंपनियों में कार्य करने वाले समस्त अभियंता या इंजीनियर भारत सरकार के अधीन होते हैं और कुछ कंपनियों में तो उनके प्रबंधक मंडल में भी भारतीय जनता पार्टी के लोग हैं! मूल रूप से जो मशीन वी वी पेट से अटैच हो वहां यह प्रोग्रामिंग आसानी से पकड़ में आ सकती है! क्योंकि वीवी पेट से कनेक्ट होने के बाद प्रोग्रामिंग वीवी पेट के लिए नहीं की जा सकती!

जब यह वोटिंग वेरीफाई पेपर ट्रेल लगाई गई, तो इनको सिर्फ 5% मशीनों के साथ ही क्यों संपर्क में लिया जाता है हर मशीन के साथ यह क्यों नहीं अटैच होती? दूसरा जब यह तकनीक ही चुनाव आयोग काम में ले रहा है तो पेपर ट्रेल क्यों नहीं मतदाता के हाथ में देता। जिससे वह एक पेटी में डालकर संतुष्ट हो ले कि उसने जिसको वोट दिया है वोट उसी को गया है! क्या इस पारदर्शी व्यवस्था के लिए चुनाव आयोग कोई कदम उठा सकेगा? यह सिस्टम हैक करने का यह तरीका क्या तानाशाही की तरफ देश का पहला कदम है?

चुनाव आयोग पर बढ़ता अविश्वास गांव गाँव में करवट ले रहा है, कल मारकंडी गांव के लोगों ने जो प्रयास किया था जो प्रशासन ने निष्फल कर दिया। लगभग उसी तर्ज पर अकोला के दो गांव में भी इस तरह की बेलेट पेपर के माध्यम से मशीनों की सत्यता की जांच के लिए बिना प्रशासन की मदद से मॉक पोल करने की घोषणाएं की है! शायद इसे भी रोक ले प्रशासन पर यह तय है चुनाव आयोग के प्रति जो भरोसा देश के लोगों को खत्म हो रहा है वह धीरे-धीरे आक्रोश की दिशा में बढ़ रहा है! क्या कठपुतली आयोग के अध्यक्ष राजीव कुमार कोई कदम उठा पाएंगे?

लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ा सवाल है!

#Evm हटाओ देश बचाओ

प्रमोद जैन पिंटू भवानी मंडी, राजस्थान

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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