
यह चित्रकूट का बालाजी मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण मुगल शासक औरंगज़ेब ने करवाया था और वहां के पुजारी महंत बालक दास के नाम एक फरमान जारी किया।
इस फरमान के तहत मंदिर को औरंगज़ेब का शाही संरक्षण मिला।रख-रखाव के लिए पास के आठ गांव मंदिर की जागीर में लिख दिए गए, जहां से महंत लगान ले सकते थे।
बकौल हिंदुस्तान टाइम्स ये गांव आज के इलाहाबाद ज़िले के हमुठा, चित्रकूट, रोदरा, सरया, मदरी, जारवा और दोहरिया हैं. फरमान के हिसाब से मंदिर को 330 बीघे ज़मीन हमेशा के लिए लिए मिल गई, वो भी टैक्स फ्री।
पास के बाज़ारों से वसूल करके मंदिर को उस ज़माने का एक रुपया रोज़ देने की बात भी फरमान में लिखी हुई है। इस फरमान की तस्वीर भी मैने लगाई है। जिस फरमान पर औरंगज़ेब के रेवेन्यू मंत्री सआदत खां की सील लगी हुई है और इसे बहरमंद खां नाम के कातिब ने लिखा है।
अब सवाल खड़ा होता है कि हिंदुओं को उस मंदिर में पूजा अर्चना करनी चाहिए या नहीं जिसे औरंगजेब ने बनवाया? मैं पशोपेश में हूं भक्त कोई रास्ता बताएं।