अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में भोर तक बजी तालियां, गूंजते रहे ठहाके

….एक हिरण अब बाॅलीवुड की लंका जलवा डालेगा, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में भोर तक बजी तालियां, गूंजते रहे ठहाके।
बाह। बटेश्वर के सांस्कृतिक मंच पर ब्रहस्पतिवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें हास्य और वीर रस की कविताओं पर शुक्रवार की भोर तक तालियां बजी, ठहाके गूंजते रहे। मुरैना के मोहित सक्सेना ने अपनी कविता ‘एक हिरण ने त्रेता युग में लंका जलवा डाली थी, एक हिरण अब बॉलीवुड की लंका जलवा डालेगा’ पर खूब वाहवाही लूटी। उन्होंने दूसरी कविता ‘धत्ती महतारी है, गाली बकोगे पछार दये जाओगे’ पर खूब तालियां बजवाई। दिल्ली के डॉ अर्जुन सिसोदिया ने अपनी व्यंग रचना ‘युद्ध नहीं जिनके जीवन में, वे भी बड़े अभागे होंगे, या तो प्रण को तोड़ा होगा, या फिर रण से भागे होंगे’ पर श्रोताओं के मन को मथ दिया। प्रतापगढ़ के पार्थ नवीन ने ‘उड़ते रहो हवाओं में कपूर की तरह, बजते रहो फिजाओं में संतूर की तरह, मुरझाए हुए फूल पर आएंगी तितलियां, एंजॉय कीजिए शशि थरूर की तरह’ पर ठहाके लगवाए। कानपुर के डॉ सुरेश अवस्थी ने समाज को चेताया ‘सोच छोटी रख खुद का बेड़ा गर्क मत करना, स्वप्न में भी किसी के स्वर्ग को नर्क मत करना, चाहते हो जो सबके दिलों में जगह बने, तो भूल कर भी बेटा बेटी में फर्क मत करना’। आगरा के दीप दिव्यांशू ने अपनी कविता ‘हथेली पर वतन के वास्ते हम जान रखते हैं, हृदय को चीर कर देखो तो हिंदुस्तान रखते हैं’ पर वंदे मातरम, जय हिंद के नारे लगवाए। कवि सम्मेलन में झुंझनू के हरीश हिंदुस्तानी, लखनऊ के डॉ योगेश चौहान, हैदरगढ़ के शिवकिशोर तिवारी, करहल के विष्णु उपाध्याय, कुमार ललित, एटा की योगिता चौहान आदि ने काव्य पाठ किया। अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ मंजू भदौरिया ने तथा संचालन टूंडला के लटूरी सिंह लट्ठ ने किया। इससे पहले कवि सम्मेलन का उदघाटन पूर्वमंत्री रामसकल गुर्जर, समाज सेवी संतोष शर्मा ने फीता काट कर किया।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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