वैभव चतुर्वेदी पर फ्राड का एक और मुकदमा : कागज में चला रहे थे 150 बेड का हास्पिटल

वैभव चतुर्वेदी पर फ्राड का एक और मुकदमा : कागज में चला रहे थे 150 बेड का हास्पिटल

–    जिला मुख्‍यालय पर विधियानी मुहल्‍ले में चल रहा था यह हवा हवाई अस्‍पताल
–    कागज में फर्जी अस्‍पताल दिखाकर वैभव को लेनी थी फार्मेसी कालेज की मान्‍यता
–    बी. फार्मा, एएनएम, जीएनएम में एडमिशन के नाम पर करोड़ों ठगी की थी मंशा
–    सीएमओ ने दर्ज कराया 419, 420, 467, 468 व 171 आईपीसी के तहत मुकदमा

संतकबीरनगर,

हरियाणा निर्मित अवैध शराब की तस्‍करी के धन्‍धे को प्रश्रय देने को लेकर चर्चाओं में आए वैभव चतुर्वेदी के फ्राड का एक और मामला सामने आया है। मामला यह है कि वैभव चतुर्वेदी के द्वारा संतकबीरनगर जिला मुख्‍यालय पर 150 बेड का वह अस्‍पताल संचलित किया जा रहा था जिसका जमीन पर कोई अस्तित्‍व ही नहीं है। इसी अस्तित्‍व विहीन अस्‍पताल को दिखाकर फार्मेसी कालेज खोलकर उसकी डिग्री बेचने की योजना उस समय खटाई में पड़ गई जब मान्‍यता देने वाली प्रदेश की संस्‍था ने जमीनी हकीकत देखने के लिए सीएमओ को हवा में चल रहे कथित अस्‍पताल की जांच करके रिपोर्ट प्रेषित करने के लिए भेज दिया।

हुआ यूं कि जिला मुख्‍यालय के प्रभा भवन मुखलिसपुर रोड के निवासी व प्रभा देवी चैरिटेबल ट्रस्‍ट के प्रबन्‍धक वैभव चतुर्वेदी ने उत्‍तर प्रदेश स्‍टेट मेडिकल फैकल्‍टी को आवेदन दिया कि वह प्रभा इंस्‍टीच्‍यूट आफ मेडिकल साइंसेज के नाम से विधियानी मुहल्‍ले में एक हास्पिटल का संचालन करते हैं। इस हास्पिटल में बहिरंग रोगी विभाग के साथ ही 100 व 50 मरीजों को बाकायदा भर्ती करने की भी सुविधा है। यही नहीं एक आपरेशन थियेटर भी है, जिसका संचालन करने के लिए पर्याप्‍त मात्रा में चिकित्‍सक व पैरामेडिकल स्‍टाफ भी हैं। अब मैं चाहता हूं कि इसमें पैरामेडिकल स्‍टाफ की पढ़ाई भी हो और उनको प्रशिक्षित करके समाज में बेहतर नर्स, फार्मासिस्‍ट आदि भेजा जा सके। स्‍टेट मेडिकल फैकल्‍टी में उनके द्वारा अस्‍पताल के पंजीकरण के कागज भी प्रस्‍तुत किए गए। इन कागजों के अध्‍ययन के दौरान स्‍टेट मेडिकल फैकल्‍टी के विद्वान अधिकारी को लगा कि एक बार इस 150 बेड के अस्‍पताल की वास्‍तविकता भी देख लेनी चाहिए। वास्‍तविकता देखने के लिए उन्‍होने जांच के लिए सीएमओ को भेज दिया। सीएमओ डॉ हरगोविन्‍द सिंह ने जब प्रस्‍तुत किए गए पंजीकरण प्रमाण पत्र की जांच की तो पाया कि उनके यहां से तो इस प्रारुप में अस्‍पताल का पंजीकरण किया ही नहीं जाता है। यही नहीं जब इसका पंजीकरण दिखाया जा रहा है तो सीएमओ तो डॉ हरगोविन्‍द सिंह ही थे। पंजीकरण कागजात पर जो हस्‍ताक्षर हैं वह उनके हैं ही नहीं। यही नहीं उस समय के एसीएमओ के भी हस्‍ताक्षर नहीं हैं। कुल मिलाकर जब प्रारुप ही उनका नहीं है तो अन्‍य चीजों का कोई सवाल ही नहीं उठता। यही नहीं उन्‍होने लिखा कि वैभव चतुर्वेदी नाम के व्‍यक्ति या उनकी संस्‍था के द्वारा उनके कार्यालय में अस्‍पताल पंजीकरण के लिए कोई आवेदन ही नहीं आया है। इसके बाद सीएमओ ने जिलाधिकारी के निर्देश पर एसपी को इस बात की लिखित जानकारी दी। एसपी ने कोतवाली खलीलाबाद को मुकदमा पंजीकृत करने का आदेश दिया। जिसके आधार पर कोतवाली खलीलाबाद की पुलिस ने कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के विधियानी मुहल्‍ले में 150 बेड का हवा हवाई अस्‍पताल संचलित करने वाले प्रभा भवन निवासी वैभव चतुर्वेदी के खिलाफ 419, 420, 467, 468 व 171 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है तथा आवश्‍यक कार्यवाही में जुट गई है।

सीएमओ ने तो प्रमाण पत्र को ही अवैध करार दे दिया

उत्‍तर प्रदेश स्‍टेट मेडिकल फैकेल्‍टी के मुख्‍य प्रशासनिक अधिकारी को भेजी गई अपनी रिपोर्ट में सीएमओ डॉ हरगोविन्‍द सिंह ने लिखा है कि – प्रभा देवी चैरिटेबिल सोसाइटी द्वारा प्रस्‍तावित प्रभा इंस्‍टीच्‍यूट ऑफ मेडिकल साइन्‍सेज विधियानी, खलीलाबाद, संतकबीरनगर के नाम से कोई हास्पिटल पंजीकृत नहीं है। संलग्‍न पंजीकरण प्रमाण पत्र संख्‍या – एचओएस / 18/ 432 वर्ष 2019 , दिनांक 10- 10- 2019 से 10- 10- 2020 तक बेड संख्‍या 100 एवं पंजीकरण प्रमाण पत्र संख्‍या एचओएस / 15 / 532 वर्ष 2019 को दिनांक 24- 10- 2019 से 30- 4- 2020 तक बेड संख्‍या – 50 जो पूर्ण रुप से अवैध है।

स्‍टेट मेडिकल फैकेल्‍टी भी दर्ज करा सकती है एफआईआर

इस रिपोर्ट को मुख्‍य प्रशासनिक अधिकारी उत्‍तर प्रदेश स्‍टेट मेडिकल फैकेल्‍टी को भेजने के साथ ही साथ इसकी प्रतिलिपि सीएमओ डॉ हरगोविन्‍द सिंह ने गत 4 जुलाई 2020 को ही प्रमुख सचिव चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं, उत्‍तर प्रदेश शासन , लखनऊ , महानिदेशक चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं उत्‍तर प्रदेश तथा अपर निदेशक चिकित्‍सा स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण, बस्‍ती मण्‍डल बस्‍ती भेजा है। सूत्रों की मानें तो उत्‍तर प्रदेश स्‍टेट मेडिकल फैकल्‍टी के समक्ष मान्‍यता का आवेदन आया था। इस मान्‍यता के आवेदन में प्रशिक्षणार्थियों के प्रयोग के लिए हास्पिटल की जगह 150 बेड के हास्पिटल दिखाए गए थे। मतलब साफ था कि स्‍टेट मेडिकल फैकल्‍टी को भ्रमित करके लाखों की फीस वाले एनएनएम, जीएनएम तथा अन्‍य कोर्सेज के लिए फर्जी तरीके से मान्‍यता लेनी थी। यह फर्जीवाड़ा चूंकि स्‍टेट मेडिकल फैकेल्‍टी के समक्ष हुआ है। ऐसे में स्‍टेट मेडिकल फैकेल्‍टी भी प्रभा इंस्‍टीच्‍यूट आफ मेडिकल साइंसेज विधियानी, खलीलाबाद, संतकबीरनगर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा सकती है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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