जालसाजी
एक-एक अभ्यर्थी से वसूले गए थे 10 से 15 लाख रुपये,

आधी रकम एडवांस जबकि आधी लेते थे रिजल्ट के बाद,जांच में खुलासा
सेंटर संचालक गुमराह करने के लिए बाकी अभ्यर्थियों पर करते थे सख्ती,कोई न कोई संदिग्ध पकड़ा देते थे
सीसी कैमरे का अनाधिकृत रूप से दिया गया था कंट्रोल पावर, ताकि आसानी से बदला जा सके मानीटर
स्क्रीन टाइम से मिला सुराग,सेकेंडों में सवाल सॉल्व
गोरखपुर। सरकारी नौकरी हथियाने की धांधली का खुलासा करने में कंप्यूटर के स्क्रीन टाइम से अहम सुराग मिला।
केंद्र के अंदर लगे सीसी टीवी कैमरों की जांच के दौरान संदेह के बाद सभी सफल 22 अभ्यर्थियों के परीक्षा देने के समय को देखा गया।
पता चला कि 22 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिनके मानीटर बदले गए उन्होंने हर सवाल का चंद सेकेंड में दे दिए हैं।
यहां तक की गणित से जुड़े सवाल के लिए भी उन्हें गुणा-भाग नहीं करना पड़ा।
इनकी परीक्षा थोड़ी ही देर में खत्म हो गई थी। लेकिन, किसी को संदेह न हो, इस वजह से इन्होंने पूरा समय बैठकर काटा और सभी के साथ बाहर निकले।
दरअसल,इस फर्जीवाड़े में स्वास्तिक ऑनलाइन सेंटर के सभी कर्मचारी शामिल हैं और इसी परीक्षा के बाद सबने अपने रास्ते भी अलग कर लिए।
केंद्र का आईटी मैनेजर अब चिड़ियाघर में आईस्क्रीम पार्लर चला रहा है तो कक्ष निरीक्षक और सेटिंग करने वाला जुगेश कुमार एक कंपनी में एमआर हो गया है।
मगर, एसटीएफ को संदेह है कि ये अब भी ऑनलाइन परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों से सेटिंग करते हैं।
जानकारी के अनुसार,ऑनलाइन सेंटर पर कोई कार्रवाई न होने पाए,
इसके लिए यह लोग अन्य अभ्यर्थियों की कड़ाई से जांच करते थे।
गुमराह करने के लिए पुलिस को सूचना भी दे देते थे,ताकि सेंटर की शुचिता पर किसी को शक न हो।
इसी फेर में सेंटर पर जितनी बार भी अभ्यर्थी पकड़े गए, उन पर और सॉल्वर पर ही कार्रवाई हुई, कोई जिम्मेदार नहीं फंसा।
मगर, इस बार एसटीएफ की जांच में खेल खुल गया।
आरोपियों ने एक अभ्यर्थी को पास कराने के बदले 10 से 15 लाख वसूले थे।
आधी रकम एडवांस के तौर ली गई थी,बाकी पैसा रिजल्ट आने के बाद लेना था।
कोई सबूत न छूटे इसलिए लेनदेन को नकद में किया जाता था।
कक्ष निरीक्षक को सीसी टीवी निगरानी का जिम्मा:
कंप्यूटर के मानीटर को बदलते समय सीसी कैमरे में करतूत कैद न आने पाए,
इसके लिए सेंटर संचालक रंजन ने कक्ष निरीक्षक को ही कैमरे की निगरानी दे दी थी।
जिस कंप्यूटर के मानीटर को बदला जाता था, वहां से सीसी टीवी कैमरे का फोकस हटा कर दूसरी तरफ की रिकार्डिंग करता था। इसी तरह से 21 मानीटर बदले गए*
इनके खिलाफ दर्ज हुआ केस:
गीडा थाने में दर्ज मुकदमे में मोद्दीपुर निवासी व सेंटर के संचालक राजीव रंजन,
कक्ष निरीक्षक रहे गोरखनाथ निवासी जुगेश कुमार गौतम,
बेलघाट के कुरीबाजार निवासी व आईटी मैनेजर अवनीश कुमार,
बड़हलगंज निवासी संस्था में कंपानडिंग ऑफिसर परमहंस यादव,
एमटीएस कंपनी के प्रभारी व पीपीगंज निवासी रामस्वरूप यादव को नामजद किया गया है।
नौकरी के बाद रौब जमाना पड़ गया भारी
झाझर के जिस शख्स ने शिकायत की है, उसके घर के पास के ही दो लड़कों ने भी गोरखपुर के सेंटर में परीक्षा दी थी।
दोनों ने नौकरी पाने के बाद पड़ोसी का उपहास उड़ाया और कहा कि दस लाख रुपये खर्च करो, तुम्हारे बेटे की भी नौकरी लगवा दूंगा।
फिर उसने शिकायत कर दी और अब जांच में पूरा खेल सामने आ गया है।
फ्लाइट से दो सीपीयू भेजे गए मुंबई, नहीं ली थी अनुमति
किसी परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी कंप्यूटर खराब होने की शिकायत करता है तो परीक्षा कराने वाली संस्था एमटीएस की के इंजीनियर ओर से अधिकृत संस्था के उसकी जांच जांच करते हैं। फिर कक्ष निरीक्षक और लखनऊ कमांड सेंटर को सूचना दी जाती है तब मानीटर बदला जाता है। लेकिन, धांधली के दिन सूचना कमांड सेंटर को नहीं दी गई थी।
बाद में कक्ष निरीक्षक ने इसकी जानकारी मुख्यालय को दी थी।
जांच में पता चला कि सिर्फ दो ही कंप्यूटर बदला गया था।
दोनों के सीपीयू को मुंबई प्रयोगशाला में जांच के लिए फ्लाइट से भेजा गया।
सीसी कैमरे से खुला फर्जीवाड़ा
एसएससी की ओर से आयोजित परीक्षा में फर्जीवाड़ा करके 22 लोगों ने सरकारी नौकरी हथिया ली।
इस मामले में झाझर निवासी चरण सिंह चौधरी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा कि ऑनलाइन परीक्षा में धांधली हो रही है।
इसका संज्ञान लेकर एसएससी मुख्यालय, नई दिल्ली को पत्र भेजा गया।
मुख्यालय ने प्रयागराज भर्ती बोर्ड को पत्र भेजकर जवाब मांगा।
इसी के बाद यूपी एसटीएफ को जांच सौंपी गई। जांच में सीसी टीवी कैमरे की मदद से पूरी घटना साफ हो गई है। पाया गया कि 21 अभ्यर्थियों के मानीटर को बदला गया है,जबकि एक सॉल्वर के बगल में ही बैठाया गया।