*”हादसे को दावत दे रहा जर्जर मकान,ज़िम्मेदार बे खबर

लखनऊ । शहर के पुराने शहर स्थित मंसूर नगर तिराहे पर हादसे को दावत दे रहा जर्जर मकान कभी भी हो सकती हैं कोई अप्रिय घटना।
मालूम हो कि 21 रमज़ान, एक अप्रैल को शियों के पहले ईमाम शेरे खुदा हज़रत अली अ.स का जुलूस ए ताबूत जो नजफ रौज़े से उठकर छोटे साहब आलम रोड बुनियादबाग़ होता हुआ काज़मैन से निकलता हुआ मंसूर नगर तिराहे से गुज़रता है ताबूत में बहुत बड़ी संख्या में नौजवान बच्चे महिलाएं व बुज़ुर्ग होते हैं शामिल।
वहीँ मंसूर नगर स्थित एक बुरी हालत में जर्जर मकान जो जुलुस के रास्ते में ही आता हैं जिसको देखने से ही दहशत होती है कब गिर जाए कुछ पता नहीं जब भीड़ होती है तो धमक भी होती इस हालत में वो किसी भी समय हादसे का सबब बन सकता है इस बार प्रशासन द्वारा बल्लियाँ लगाकर घेराबंदी कर अपना दामन झाड़ भले ही लिया गया हो, लेकिन क्या मात्र खाना पुरी करने से हादसे को रोका जा सकता है?
जबकि इसी रास्ते से मोहर्रम के भी बहुत से जुलूस निकलते हैं जिसमें लाखों की संख्या में लोग शामिल होते हैं।
जन समूह का आलम यह होता है कि ताबूते मौला अली की एक झलक पाने व उसको कंधा देने के लिये लोगों को ज़ख़्मी तक होना पड़ता है लेकिन वो अपने मौला की चाहत में हर तकलीफ़ बर्दाश्त करते है।
वहीँ प्रशासन की ज़िम्मेदारी बनती है कि जनता को कोई तकलीफ़ ना हो और सब कुछ अमन शान्ति से संपन्न हो।
जहाँ तक उक्त जर्जर मकान का सवाल है पूर्व में कई बार नोटिस चस्पा करने के बाद अभी तक कोई क्यों कार्यवाई नहीं हुई ?
या फिर ज़िम्मेदार कोई बड़े हादसे का कर रहे हैं इंतजार ???