
औरैया,बड़ी विडंबना ह इस देश की एक और भ्रष्टाचार तो दूसरी तरफ शिष्टाचार
इस देश की बहुत बड़ी विडंबना है की की पत्रकारिता करना बहुत ही जोखिम भरा कर हो गया है पत्रकार अगर सच्चाई उजागर करता है या किसी माफिया के खिलाफ कोई कार्रवाई की मांग करता है तो वही माफिया और गलत धंधों में लिफ्ट जैसे की खनन माफिया भू माफिया नकली एवं नशीली दवाइयां के माफिया दारू माफिया इनके खिलाफ जब भी पत्रकार शासन को आईना दिखाने का कार्य करता है दुर्भाग्य की बात यह है की चौथा स्तंभ खाने वाला पत्रकार को चारों तरफ से माफिया और पुलिस की मिली पैसों की गढ़ जोर से पत्रकारों के ऊपर झूठ ऐसे आरोप लगाए जाते हैं जैसे की पत्रकार ने देशद्रोह का काम किया हो और उसके ऊपर इतने ऊपर संगीत धाराएं लगाई जाती हैं की पत्रकार हर कर कभी-कभी अपनी जीवन लीला समाप्त करने के बारे में सोचने लगता है मैं एक सब समाज से पूछना चाहता हूं कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है पत्रकार एक निष्पक्ष अपना कार्य करता है पत्रकार जो लिखना है प्रशासन को उसे पर संज्ञान में लेना चाहिए तथा उसकी जांच करनी चाहिए ना की लिखने वाले पत्रकार को ही टारगेट कर उसका ही शोषण करना चाहिए हाल ही दिनों में देखा गया है कस्बा मुरादगंज ऑल इंडिया रिपोर्टर्स संगठन के प्रदेश सचिव आशु भदोरिया ने कुछ समाज के कुंठित व्यक्तियों के लिए लेख प्रकाशित कीजिए तो एक विशेष वर्ग उनके पीछे पड़ गया तथा जिले के समस्त अधिकारियों के सामने झूठी मनगढ़ंत कहानी कहकर एक ईमानदार पत्रकार को बदनाम कर उसकी छवि खराब कर उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज कराई गई मगर यहां पर एक बात और उठाती है की जिन धाराओं मैं पत्रकार पर मुकदमा दर्ज किया गया क्या उसका कोई भी प्रमाण किसी भी व्यक्ति के पास हो तो वह कुछ अधिकारियों के सामने रख सकता है साइबर एक्सप्रेस के संवाददाता आशु भदोरिया ने कहा कि मैं आज तक किसी से रंगदारी के रूप में एक रुपया नहीं लिया और ना ही किसी को जान से मारने की धमकी दी क्योंकि ना तो मेरे दादा ना मेरे पिता ना मेरे पास ना मेरे परिवार के पास किसी के पास कोई भी लाइसेंसी हथियार नहीं है तो हत्या की बात कहां जायज है अगर मैं किसी से रंगदारी मांगी है तो वह सच प्रस्तुत करें अगर सही पाए गए तो मैं श्वेता हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ जाऊंगा