
भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि, होलिका दहन के लिये उत्तम मानी जाती है। यदि भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा का अभाव हो परन्तु भद्रा मध्य रात्रि से पहले ही समाप्त हो जाए तो प्रदोष के पश्चात जब भद्रा समाप्त हो तब होलिका दहन करना चाहिये। यदि भद्रा मध्य रात्रि तक व्याप्त हो तो ऐसी परिस्थिति में भद्रा पूँछ के दौरान होलिका दहन किया जा सकता है। परन्तु भद्रा मुख में होलिका दहन कदाचित नहीं करना चाहिये। धर्मसिन्धु में भी इस मान्यता का समर्थन किया गया है।
निर्णय सिंधु के भी मतानुसार होलिका दहन भद्रा रहित प्रदोष काल व्यापिनी – फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है।
होलिका दहन मुहूर्त
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इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा केवल 24 मार्च को ही प्रदोष व्यापिनी है। 25 मार्च को पूर्णिमा तिथि दिन 12:30 पर समाप्त हो रही है। 24 मार्च को भद्रा अर्द्धरात्रि 12:33 से पहले रात्रि 11:12 पर समाप्त हो रही है। अतः होलिका दहन 24 मार्च को रात्रि 11:15 से 12:20 के मध्य करना शुभ रहेगा।
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ 24 मार्च को प्रातः 09:55 बजे से।
पूर्णिमा तिथि समाप्त 26 मार्च को दिन 12:30 बजे।
रंगवाली होली (धुलण्डी) 26 मार्च मंगलवार को मनाई जाएगी।
साभार~ पं देवशर्मा