कच्चे तेल की कीमत में रिकॉर्ड गिरावट, बोतलबंद पानी से भी हुआ सस्ता

कच्चे तेल की कीमत में रिकॉर्ड गिरावट, बोतलबंद पानी से भी हुआ सस्ता

20 अप्रैल को न्यूयॉर्क ऑयल मार्केट में कोहराम देखने को मिला यहां तेल की कीमतें इतनी गिरी की कच्चा तेल बोतलबंद पानी से भी सस्ता हो गया. बता दें कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट मई महीने में की जाने वाली सप्लाई के लिए है.

कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड गिरावटअमेरिका के तेल बाजार में कोहराम

कोरोना महामारी ने धराशायी किया तेल बाजार

कोरोना वायरस के विश्वव्यापी संक्रमण की वजह से कच्चे तेल की कीमतें भरभराकर गिर पड़ी हैं. न्यूयॉर्क में कच्चे तेल की कीमतों में अभी तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.
20 अप्रैल को न्यूयॉर्क ऑयल मार्केट में कोहराम देखने को मिला यहां तेल की कीमतें इतनी गिरी की कच्चा तेल बोतलबंद पानी से भी सस्ता हो गया. बता दें कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट मई महीने में की जाने वाली सप्लाई के लिए है.

कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड गिरावट

यहां पर यूएस बेंचमार्क में रिकॉर्ड गिरावट हुई और मई के लिए सप्लाई की जाने वाली तेल की कीमतें एक समय गिरकर 1.50 डॉलर प्रति बैरल हो गई. ये कच्चे तेल की कीमतों में एक दिन में 90 फीसदी की गिरावट थी.

मई महीने के लिए कीमतों में गिरावट

बता दें कि मई महीने में कच्चे तेल की सप्लाई के लिए कॉन्ट्रैक्ट 21 अप्रैल को खत्म होने को है, लेकिन तेल के खरीदार नहीं मिल रहे हैं. क्योंकि दुनिया की बड़ी आबादी इस वक्त घरों में बंद है और दुनिया के कई देश तेल का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.

ट्रेडिंग सेशन के दौरान बाजार में आगे भी कीमतें गिरती रही. सोमवार को न्यूयॉर्क में यूएस बेंचमार्क वेस्ट टेक्सॉस इंटरमीडिएट में मई के लिए कच्चे तेल के ठेके में 301.97 फीसदी की गिरावट हुई और ये -36.90 डॉलर प्रति बैरल पर आकर रूका. मई महीने में सप्लाई की जाने वाली कच्चे तेल की कीमतें अधिकत्तम 17.85 डॉलर प्रति बैरल और न्यूनत्तम -37.63 डॉलर प्रति बैरल रही. आखिरकार बाजार-37.63 डॉलर प्रति बैरल पर आकर बंद हुआ. ये पहली बार है जब न्यूयॉर्क में कच्चे तेल की कीमतें निगेटिव में चली गई हैं.

खपत नहीं हुआ पुराना तेल, रखने की जगह नहीं

कच्चे तेल की कीमतें माइनस में जाने का ये मतलब नहीं है कि आज या कल से ही तेल सस्ता हो गया है. दरअसल मई महीने में कच्चे तेल की सप्लाई के लिए जो ठेके दिए जाते हैं वो अब निगेटिव में चला गया है. तेल विक्रेता दुनिया के देशों से तेल खरीदने के लिए कह रहे हैं लेकिन तेल खर्च करने वाले देशों को इसकी जरूरत नहीं है, क्योंकि उनकी अरबों की आबादी घरों में बैठी है लिहाजा वे तेल नहीं खरीद रहे हैं. उनका तेल भंडार भरा हुआ है, पुराना तेल खर्च न होने से उनके पास नया तेल स्टोर करने के लिए जगह नहीं है. इसलिए वे तेल नहीं खरीद रहे हैं…!!

*सऊदी अरब*
रमजान के दौरान मक्का और मदीना की दो पवित्र मस्जिदों में नमाज नहीं होगी…!!

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