
एटा,जलेसर: एक ही ब्लाक में तीन साल से जमे ग्राम पंचायत अधिकारियों(पंचायत सचिव) के फेरबदल को शासन से सख्त निर्देश जारी किए गये थे जिसके चलते ग्राम्य विकास एवं पंचायती राज विभाग के अधिकारियों ने ब्लाकवार सूची बनाना शुरू कर दिया था। जिसमें एक माह के अंत तक सचिवों के ब्लाक परिवर्तन करने के निर्देश के बावजूद भ्रष्ट छवि वाले पंचायत सचिव ज्यों की त्यों मठाधीश बने रहे। राज्य सरकार ने एक आदेश जारी कर ग्राम पंचायत सचिवों की तबादला नीति में बदलाव किया है। नये सिरे से तय नीति के मुताबिक जिले में कार्यरत पंचायत सचिव की कुल संख्या के अधिकतम 10 प्रतिशत तबादले ही हर साल किये जा सकेंगे। जिले की ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों की निगरानी के लिए ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारियों की तैनाती की गई है। इनके जिम्मे ही भुगतान संबंधी सारे कार्य होते है। लाखों रुपये के भुगतान प्रधान व सचिव के डोंगल से ही होते हैं। ऐसे में कई जगहों में प्रधान के साथ साठगांठ होने से सचिव वर्षों तक ब्लाक नहीं छोड़ रहे है। जिले में दर्जनों सचिव हैं जो एक ही ब्लाक में दशकों से कार्य कर रहे है। कई सचिव एसे भी हैं जो पाँच साल से अधिक समय से एक ही ब्लाक में एक ही पंचायत पर समय गुजार चुके हैं। शासन से निर्देश के बाद सभी सचिवों की कुंडली भी निकाली जा चुकी बावजूद इस सूची के बनने से सचिवों में कुछ समय तक खलबली मची कि बनने वाली सूची में साल का जिक्र हो रहा है। सूची पूरी होते ही सचिवों का एक माह के अंदर दूसरे ब्लाकों में तबादला किया जाएगा। जिला पंचायत राज अधिकारी ने बताया था कि सूची बनाई जा रही है। दूसरे ब्लाकों में स्थानांतरण के संबंध में एक माह तक का समय मिला है वावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत के चलते शकरौली पंचायत पर दशकों से तैनात सचिव को तबादला सूची से कोसों दूर रखा गया है जो वर्षों से चर्चा का विषय बना हुआ है ।