एक खत तेरे नाम मैं लिख दूं।

एक गज़ल– #खत_तेरे_नाम_मैं_लिख_दूं..!

आज मन में आया ,,एक खत तेरे नाम मैं लिख दूं।
सुबह लिखू वो तेरी,,इंतजारों की शाम मैं लिख दूं।

सांसो की आहट सुन,,हम तुम जब इतने पास हुये,
प्रीत लिखूँ थोड़ी सी,वो मंजर अभिराम मैं लिख दूँ।

दूर हुए जब चलते-चलते,,इक दूजे से हुये लापता,
विरह लिखूँ वो प्रेम का,तेरा अल्पविराम मैं लिख दूँ।

चाहत की उस बस्ती में,अक्सर कुछ रह जाता था,
जो छूटा तेरे आँगन में,वो थोड़ा सामान मैं लिख दूँ।

तेरे खत का पुर्जा इक डिब्बी में,,जो मेरे हाथ लगा,
लिखूं वो महबूब इबारत,छोटा वो पैगाम मैं लिख दूँ।

यह लिखूं वो लिखूँ सब कुछ मैं इतना कैसे लिख दूं,
खत में सिर्फ “तुम” लिख के,इक सलाम मै लिख दूँ।
#राजू_उपाध्याय(स्वरचित)

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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