एटा के भ्रष्ट सी एम ओ के खिलाफ किसान यूनियन भानु के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सी एम ओ आफिस घेरा..!

एटा के भ्रष्ट सी एम ओ के खिलाफ किसान यूनियन भानु के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सी एम ओ
आफिस घेरा..!
*भ्रष्टाचार से अर्जित सी एम ओ अरबों की संपत्ति की जांच एवं स्थापना लिपिक जाफरी करतूतों की जांच की मांग की”

एटा। तरह तरह के भ्रष्टाचार एवं अपनी अनियमित कार्य प्रणाली के कारण सुर्खियों में रहे एटा के सी एम ओ डा उमेश कुमार त्रिपाठी के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन भानु गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने सैकड़ों किसानों के साथ सीएमओ परिसर को घेर लिया और धरने पर बैठ गए। उन्होंने एलानियां तौर पर कहा एटा के सी एम ओ भ्रष्टाचार में लिप्त है एटा सहित आगरा अन्य जिलों में सरकारी बजट को लूटा है जिससे करोड़ों की सम्पत्ति अर्जित की है।अपने सरकारी स्थापना लिपिक सलमान जाफरी से सीनियर अधीक्षक पवन शर्मा के साथ गाली गलौज कर वसूली का दबाव बनाया जा रहा था। मीडिया से बातचीत में प्रखर किसान नेता भानु प्रताप ने कहा जब तक इनकी अवैध संपत्तियो पर बुलडोजर नही चलता भ्रष्ट सी एम ओ एवं लिप्त बाबू संस्पेंड नही होता तब तक किसान यूनियन आंदोलनरत रहेगी।उन्होंने कहा है जिन जिन जिलों में इनकी संपत्तियां हैं उनकी प्रभावी जांच होनी चाहिए और बुलडोजर चलना चाहिए । समाचार लिखे जाने तक धरना घेराव का कार्यक्रम चलता रहा । स्मरण रहे उक्त विभाग के वर्तमान सी एम ओ के विरुद्ध पिछले ढाई साल के अंदर स्वास्थ विभाग में भ्रष्टाचार के सारे रिकार्ड ध्वस्त हो गए है। अनेक तथ्य परक शिकायते और दस्तावेजी सबूत जांच अधिकारियों को देने के बावजूद विभागीय भ्रष्टाचार की जांचे कछुआ गति से चल रही है। पर्दे के पीछे गिव एंड टेक की प्रेक्टिल थ्योरी से आरोपियों की मदद की जा रही हैं।इधर नित नए तथ्य उजागर हुए हैं जिसके तहत कहा जा रहा है सी एम ओ एटा सरकारी पद पर रहते हुए अपने परिवारजनों की व्यवसायिक कंपनियों फर्मों के पोषण में लगे है। आगरा सिकंदरा स्थित (फोटो कोलाज में छायांकित) इनके बेटे की कंपनी के लिए काम करने बाली लगभग दस फर्में है जिनको एटा के स्टेट बजट एवं एन एच एम बजट से विविध तरह की खरीद कराई गई है इस खरीद के भुगतान का लाभ अंततः बेटे की कंपनी को हुआ है क्योंकि सारी सामग्री इसी कंपनी से मुखौटा फर्मों ने की है। स्वास्थ विभाग में सी एम ओ डा उमेश कुमार त्रिपाठी के भ्रष्टाचार के हथकंडो से वाफिक सुविज्ञ सूत्रों ने यहां तक बताया है कि आगरा में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी रहते हुए इन्होंने अनेक आदेश अपनी कंपनी एवम फर्मों के नाम किए थे और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से भी कराए। बताया जा रहा है कि सरकारी बजट का अपने हित में बंदरबांट करने के लिए उक्त अफसर अपना निजी रेकिट फर्मों और कंपनियों का लेकर आए और उनको पनपने में लगे रहे। मजे की बात तो यह है कि विभागीय आयोजनों में जो प्रशिक्षण कार्यशालाएं आदि होती हैं इनमे भोजन जलपान आदि भी आगरा की फर्में आपूर्ति करती है। जबकि एटा में अनेक नामी गिरामी संस्थान क्रियाशील है फिर भोजन आदि आगरा से लाने की क्या तुक है.? यह सवाल खुद ब खुद सी एम ओ के आगरा प्रेम के पीछे छुपे रहस्य को बेनकाब स्वत ही कर देता है। विभाग में पिछले ढाई वर्ष को अंदर उक्त सी एम ओ ने अनेक आदेश प्रशासनिक स्तर पर ऐसे प्रचलित कर दिए हैं जो न तो शासनादेश के मुताबिक है और न किसी प्रशासनिक निर्देश के तहत हैं अनेक राजपत्रित अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण कर कर्मचारियों को अपनी पपेट बना कर उलजलूल दबाव देकर काम कराया जा रहा है। यदि पिछले ढाई वर्ष के विभागीय कामकाज की सघन पड़ताल की जाए तो स्वास्थ विभाग में भ्रष्टाचार बहुरूपिया अवतरण में सरकारी धन का अपहरण करता जगह जगह पर मिलेगा। चाहे वह बजट की व्यवस्था में या प्रशासनिक कथित तेजी तुर्शी के नाम पर किए गए कामकाज।
एटा के स्वास्थ विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर प्रखर किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह के मोर्चा खोले जाने से विभाग की चूलें हिलने लगी हैं कहा जा रहा अब यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने किसी भी क्षण पेश हो सकता है। कार्यवाही के लिए केंद प्रदेश सरकार के उच्च पटल पर ले जाने की तैयारी कर ली है। अब देखना है शासन प्रशासन स्वास्थ विभाग के बहुरूपिया भ्रष्टाचार के खिलाफ क्रांतिकारी किसान नेता का यह अभियान क्या रंग दिखाता है.??

About The Author

निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अपडेट खबर के लिए इनेबल करें OK No thanks