सनातन धर्म की प्रचंड आस्था से अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को श्री राम मंदिर में मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह भारत का स्वर्णिम काल – राजू आर्य
भारत की एकता अखंडता और विश्व शांति के लिए एकमात्र उपाय है सनातन धर्म
पूरे विश्व के प्राणी मात्र के कल्याण हेतु अचूक रामबाण है वसुदेव कुटुंबकम मंत्र
विशनपाल सिंह चौहान प्रधान संपादक अलार्म इंडिया न्यूज

एटा। सनातन धर्म तथा हिंदुत्व में अगाध आस्था के प्रबल सचेतक एवं युवा किसान नेता व प्रमुख समाजसेवी तथा राष्ट्रवाद बाद के घोर समर्थक और गऊ,गीता, गंगा,गायत्री एवं पर्यावरण के प्रमुख हितैषी, पीड़ितों कमजोरों,असहायों, वृद्धो तथा जरूरतमंदों के लिए आधी रात मदद के लिए अपना दरवाजा खुला रखने वाले राजू आर्य ने अलार्म इंडिया न्यूज को एक विशेष भेंट में जानकारी देते हुए कहा है कि आगामी 22 जनवरी को अयोध्या धाम में प्रभु श्री राम मंदिर में उनकी मूर्ति स्थापित होना पूरे विश्व के हिंदुओं के लिए गर्व की बात है।
श्री आर्य ने आगे कहा कि 500 वर्ष के उपरांत देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी के अकाट्य प्रयासों से भारत वासियों को यह स्वर्ण इतिहास रचने का मौका प्राप्त हो रहा है, जिसके लिए केंद्र तथा उत्तर प्रदेश की सरकारें व पूरी बीजेपी और करोड़ों राम भक्त इस उपलब्धि के लिए बधाई के पात्र हैं।
राजू आर्य ने दृष्टांत प्रस्तुत करते हुए आगे कहा कि सनातन धर्म को हिंदू धर्म के वैकल्पिक नाम से भी जाना जाता है। वैदिक काल में भारतीय उपमहाद्वीप के धर्म के लिए ‘सनातन धर्म’ नाम मिलता है। ‘सनातन’ का अर्थ है- शाश्वत या ‘सदा बना रहने वाला’, यानी जिसका न आदि है, न अंत। सनातन धर्म मूलतः भारतीय धर्म है,जो किसी समय पूरे वृहत्तर भारत (भारतीय उपमहाद्वीप) तक व्याप्त रहा है। विभिन्न कारणों से हुए भारी धर्मांतरण के उपरांत भी विश्व के इस क्षेत्र की बहुसंख्यक जनसंख्या इसी धर्म में आस्था रखती है।
वसुधैव कुटुम्बकम् सनातन धर्म का मूल संस्कार तथा विचारधारा है
वसुधैव कुटुम्बकम् सनातन धर्म का मूल संस्कार तथा विचारधारा है जो महा उपनिषद सहित कई ग्रन्थों में लिपिबद्ध है। इसका अर्थ है- धरती ही परिवार है। यह वाक्य भारतीय संसद के प्रवेश कक्ष में भी अंकित है। अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम् । उदारचरितानां तु वसुधैवकुटुम्बकम् ।
वसुदेव कुटुंबकम का सिद्धांत
वसुधैव कुटुंबकम” एक संस्कृत का श्लोक व कहावत है।
जिसका अर्थ है दुनिया एक परिवार है” यह विचार हमें सिखाता है कि पृथ्वी पर हर कोई एक बड़े वैश्विक परिवार के सदस्य की तरह है। यह एक-दूसरे के साथ दयालुता, सम्मान और समझ के साथ व्यवहार करने को प्रोत्साहित करता है,और इसी सिद्धांत पर चलकर पूरे भारत देश में एकता अखंडता पल्लवित होगी तथा विश्व में शांति भी कायम रह सकती है।