आलू की फसल को  झुलसा बीमारी से बचाने की  कृषकों को दी जानकारी

बरेली 28 दिसंबर| जिला उद्यान अधिकारी श्री पुनीत पाठक ने बताया कि केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान,मेदीपुरम,मेरठ द्वारा विकसित इण्डो-ब्लाइटकास्ट(पैन इण्डिया माडल) से पिछेता झुलसा बीमारी का पूर्वानुमान लगाया गया है। अतः पिछेता झुलसा बीमारी के पूर्वानुमान के सम्बन्ध में कृषकों को सलाह दी गयी है कि जिन किसान भाइयों ने आलू की फसल में अभी तक फफूंद नाशक दवा पर्णीय छिड़काव नही किया है या जिनकी आलू की फसल में अभी पिछेता झुलसा बीमारी प्रकट नही हुयी है,उन सभी किसान भाइयों को यह सलाह दी जाती है कि वे मैन्कोजेब/प्रोपीनेब/क्लोरोथेलोंनील युक्त फफूदनाशक दवा रोग सुग्राही किस्मों पर 0.2-0.25 प्रतिशत की दर से अर्थात 2.0-2.5 किलोग्राम दवा 1000लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टेयर छिड़काव तुरन्त करे। साथ ही साथ यह भी सलाह दी जाती है कि जिन खेतों में बीमारी प्रकट हो चुकी है उनमें किसी भी फफूदनाषक साइमोक्सेनिल + मैन्काजेब का 3.0 किलोग्राम प्रति है0(1000लीटर पानी) की दर से अथवा फेनोमिडोन +मैन्कोजेब का 3.0 किलोग्राम प्रति है0(1000लीटर पानी) की दर अथवा डाइमेथोमाफ 1.0किलोग्राम+मैन्काजेब का 2.0किलोग्राम(कुल मिश्रण 3.0 किग्रा0) प्रति हैक्टेयर(1000लीटर पानी) की दर से छिड़काव करें। फफूंदनाशक को दस दिन के अन्तराल पर दोहराया जा सकता है । लेकिन बीमारी की तीव्रता के आधार पर इस अन्तराल को घटाया या बढ़ाया जा सकता है। किसान भाइयों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि एक ही फफूंनाशक को बार-बार छिड़काव न करे एवं बारिश के दौरान फफूंदनाशक के साथ स्टीकर को 0.1प्रतिशत की दर(1.0मिली0प्रति लीटर पानी) के साथ मिलाकर प्रयोग करे।

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पं.सत्यम शर्मा

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