बदलते मौसम और ठंड को देखते हुए खानपान के साथ-साथ क्या-क्या सावधानी होनी चाहिए डॉक्टर~ डी के मौर्य

बरेली :: एस0आर0एम0 राजकीय आयुर्वेदिक कालेज एवं चिकित्सालयए बरेली के प्राचार्य एवं अधीक्षक प्रोफेसर डी0के0मौर्य ने बदलते मौसम और ठंड में लोगों का जागरूक करने के लिये बताया कि ठंड बढ़ते ही इम्यूनिटी कमजोर होने लगती है। ऐसे में कुछ ऐसा खाना चाहिए जिससे सर्दियां मजे में कट सके!
सर्दी आते ही कुछ सीजनल बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता हैं। इनमें सर्दी जुकाम टॉन्सिल जोड़ों में दर्द फ्लू साइनासिटिसख् खुजली त्वचा का रूखापन सोरियेसीस चर्म रोग आदि की समस्या बढ़ जाती है। अधिकांश लोग इनमें से कुछ न कुछ परेशानियों का सामना करते ही हैं। कुछ संक्रमण की बीमारियां भी एक से दूसरे लोगों को संक्रमित करने लगती है। हालांकि इन बीमारियों का इलाज आसानी से हो जाता है। लेकिन शरीर को इन बीमारियों से दूर रखने के लिए उचित आहार या बैलेंस डाइट बहुत जरूरी है। अगर हम अपने आहार में सही से बदलाव कर लें तो ये बीमारियां हम तक पहुंचेंगी ही नहीं। दरअसलए सर्दी शुरू होते ही तापमान में गिरावट आती है इससे बॉडी के तापमान को संतुलित होने में समय लगता है। इस दौरान शरीर को ताकत ज्यादा जरूरी होती है। ऐसे में सही खानण्पान बहुत आवश्यक है।
 इंफेक्शन का हमला शरीर पर न हो, इसके लिए जरूरी है कि शरीर का इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होए इसके लिए विटामिन सी का सेवन बहुत जरूरी है। विटामिन सी के लिए मौसमीए आवंलाए किन्नूए आदि खटटे फलों का सेवन ज्यादा करें। इसके अलावा हरी पत्तीदार सब्जियांए सीजनल सब्जियों आदि का इस्तेमाल ज्यादा करें।
 सर्दी के मौसम में हड्डियों के कमजोर होने की आशंका ज्यादा रहती है। इसलिए हमारे शरीर को कैल्शियम की जरूरत बढ़ जाती है। खासकर बुजुर्गों को, इसके लिए मूंगफलीए दूध से बने प्रोडक्टए बींस, मसूर की दाल, बादाम आदि का सेवन अच्छा होगा। सीजनल सब्जियों में भी कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में होता है।
 इस मौसम में हर्बल टीए ग्रीन टी का सेवन बढ़ा दें, हर्बल टी मतलब तुलसी के पत्ते, तुलसी में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो हदय की सेहत के लिए लाभदायक होते हैं। हर्बल टी में लोग अदरक गोल मिर्च लोंग आदि मिलाकर पीते हैं। जो बहुत लाभकरी है। इस मौसम में दालचीनी को सेवन लाभदायक होता है। दालचीनी में भी एंटीऑक्सीडेंट होता है। सबसे बड़ी बात यह है कि दालचीनी बहुत अच्छा डिटॉक्स है। इससे शरीर का डिटॉक्सीफाई हो जाता है। यह शरीर में सोडियम को जमा होने से रोकता है। इससे मेटाबोलिक रेट बढ़ता है जिससे वजन पर लगाम लगती है!
 सर्दी के मौसम में गुड़ खाना और तिल खाना अच्छा होता है। गुड़ में अत्यधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं। जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। इसे खाने से सर्दी जुकाम की समस्या से बच सकते हैं। तिल में फाइबर आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं। जो कई तरह के रोगों से बचाते हैं। तिल के नियमित सेवन से पाचन शक्ति मजबूत होती है। साथ ही तिल शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं। ठंड के मौसम में तिल का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद होता है। तिल के लड्डू भी बनाकर खा सकते हैं।
 जाड़े के मौसम में अदरक का सेवन लाभकारी हैं। अदरक में एंटी आक्सीडेंट और एंटी इफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। जो रोगों से बचाने में मदद करते हैं। गुड सौठ और देसी घी से बने लडडू ठंड में बडे लाभकारी होते हैं। इससे शरीर की इम्यूनिटी या रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है।
 ठंड के मौसम में बहुत सारे लोग नाश्ता नही करते हैं। प्रोटीनयुक्त नाश्ता जरूरी है। ठंड के मौसम में मौसमी फलों को लेना जरूरी है। फलों का सेवन दोपहर को करें। अगर कोई सब्जी पसंद नहीं है तो उसका सूप बनाकर पिया जा सकता है। ठंड में वेजीटेबल सूप बहुत फायदेमंद है।
 ड्राई फ्रूट उन्हें हम सर्दियों में ले सकते हैं।अधिकतर ड्राई फ्रूट गर्म तासीर की होते हैं। बादाम अखरोट का सेवन सर्दियों में बहुत फायदेमंद है। इससे शरीर में गर्मी का अहसास होता है। सर्दी में इनको खाने के लिए इन्हें पानी में भिंगोकर रखने की भी जरूरत नहीं है। इसके अलावा शरीर को गर्म रखने के लिए फिश चिकेन अंडे का सेवन भी फायदेमंद हैं। ये सब शरीर को गर्म रखते हैं! हरी पत्तीदार या सीजनल सब्जियों को जरूर अपनी डाइट में शामिल करें!
 जिस तरह नॉन वेज खाना शरीर को गर्म रखता है। उसी तरह वेजीटेरियन के लिए पनीर और दूध हल्दी का सेवन बहुत फायदेमंद है। दूध में हल्दी मिलाकर या सौंठ मिलाकर पीने से शरीर गर्म रहता है। इसके अलावा ग्रीन वेजीटेबल भी फायदेमंद है। रागी की रोटी शरीर को गर्म करने के लिए अच्छी डाइट है। रागी में वे सभी पोषक तत्व होते हैं जो शरीर को गर्म रखने के लिए जरूरी है। इसमें पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम मोजूद होता है जो हड्डियों को मजबूत करता है। रागी के अलावा बाजरे की रोटी भी इसी तरह से काम करती है। सर्दियों में एक या दो बाजरे या रागी की रोटी खाने से फर्क महसूस होने लगेगा। इसके अलावा चुकंदरए स्प्राउट और हरी पत्तीदार सब्जियां सर्दियों में गर्मी का अहसास देने और इंफेक्शन से बचाने में बहुत काम की है।
 बदलते मौसम में रूखी हवाओं का असर शरीर की त्वचा पर पडता है त्वचा की नमी चली जाती है जिससे त्वचा में रूखापन आने लगता है चमक चली जाती है त्वचा में खिचाव आने लगता है त्वचा फटने लगती है उसे खत्म करने के लिये गुनगुने पानी का प्रयोग करें । सोने से पहले होठो पर मलाई लगायें गुलाब जल और ग्लिसरीन मिलाकर चेहरे और नाक की मसाज करें। गाजर का सेवन बडा फायदेमंद होता है सलाद के अलावा गाजर के हलवे का भी प्रयोग करे । यह त्वचा का रूखापन और झुर्रीयों को दूर करके उसमें चमक लाती है। टमाटर में अच्छे पोषक तत्व होते हैं जेसे लाइकोपीन आदि जो चेहरे की झुर्रीयों को दूर करता है काले धब्बों को दूर करने में मदद करता हैं।
 लहसुन के सेवन से धमनियों में खून नहीं जमता । पेट की हानिकारक कीडों को मारता है लहसुन में एलिसिन नामक तत्व पाया जाता है जो एन्टीबायटिक की तरह काम करता है और शरीर को संक्रमण या इन्फैक्शन से बचाये रखता है। लहसुन के सेवन से शरीर में रोगों से लडने की शक्ति का विकास होता है।
 सांस की परेशानी होने पर सांस लेते समय आवाज आती हो तो एक कटोरी में थोडा सा पानी थोडा सा घी या तेल और चुटकी भर सेंधा नमक मिलाकर गुनगुना कर छाती और कमर पर लगायें और सिकाई करें तो बडा लाभकरी होती है। तुलसी पत्ती अदरक व काली मिर्च का काढा बनाकर पीने से सर्दी व जुकाम खत्म हो जाते हैं।
 शरीर में पानी की कमी होने से शरीर में रूखापन खुजली के साथ साथ नाक होठों और मुहं में सूखापन आ जाता उसके लिये सर्दीयों में गुनगुना पानी या टमाटर का सूप पालक का सूप या सब्जीयों का सूप पिलायें इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी।
 गले में खराश होने पर तुलसी के पत्तों का काढा , अथवा 5 से 7 तुलसी पत्तों को एक गिलास पानी में उबालकर पीना लाभदायक है। चारण्पांच लौंग को आधे कप पानी में डालकर उबालें आधा रह जाने पर छानकर सुबह शाम पीने से आराम मिलेगा।
 भोजन करने से पहले अदरक सेंधा नमक और नीबू को मिलाकर लें। इससे पाचन शक्ति मजबूत होगी और भूख भी लगेगी। ठंड के मौसम में पाचन बेहतर है तो फिर बीमारी परेशान नही करेगी।
 ठंड के मौसम में तैल मालिश करनी चाहिये इससे हदय रोग जैसे ब्लड प्रेशर बढने तथा अटैक पडने की सम्भावना कम होती है।

About The Author

पं.सत्यम शर्मा

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अपडेट खबर के लिए इनेबल करें OK No thanks