आप्रेशन जाग्रति अभियान में एसएसपी ने छात्राओं से कहा कि गलत को छिपाएं नहीं, बल्कि… बताएें

आप्रेशन जाग्रति अभियान में एसएसपी ने छात्राओं से कहा कि गलत को छिपाएं नहीं, बल्कि… बताएें
====================एटा ! ऑपरेशन जागृति अभियान के तहत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिहं एवं क्षेत्राधिकारी सदर द्वारा थाना मारहरा क्षेत्र के मुन्नालाल गुलजारी लाल हिंदू मुस्लिम इंटर कॉलेज मारहरा में छात्र/छात्राओं के साथ गोष्ठी आयोजित कर उनको ऑपरेशन जागृति अभियान के उद्देश्यों को बताते हुए उन्हे जागरूक किया गया।
ऑपरेशन जागृति अभियान के तहत अपर पुलिस अधीक्षक धनंजय सिहं कुशवाहा एवं क्षेत्राधिकारी अलीगंज द्वारा थाना कोतवाली जैथरा क्षेत्र के एस0 एस0 एस0 पब्लिक स्कूल जैथरा में छात्र/छात्राओं के साथ गोष्ठी आयोजित कर उनको ऑपरेशन जागृति अभियान के उद्देश्यों को बताते हुए जागरूक किया गया !
इसी तरह ऑपरेशन जागृति अभियान के तहत क्षेत्राधिकारी नगर विक्रांत द्विवेदी द्वारा थाना कोतवाली नगर क्षेत्र के राम बाल भारती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अरुणानगर में छात्र/छात्राओं के साथ गोष्ठी आयोजित कर उनको ऑपरेशन जागृति अभियान के उद्देश्यों को बताते हुए जागरूक किया गया ! एडीजी आगरा जोन के निर्देशन में महिलाओं एवं बालिकाओं के जागरूकता व स्वावलंबन एवं उनके प्रति होने वाले अपराधो में कमी लाने हेतु चलाए जा रहे ऑपरेशन जागृत अभियान के तहत जागरूकता अभियान के तहत समस्त थाना क्षेत्रों में भी गोष्ठी आयोजित कर, महिलाओं/ बालिकाओं/ छात्राओं एवं क्षेत्र के गणमान्य लोगों से संवाद स्थापित किया उनको जागरूक किया गया, साथ ही गोष्ठी में प्रतिभाग करने वाले लोगों से फीडबैक भी लिया गया।
इसके अलावा जागरूकता अभियान के तहत की गई गोष्ठियों में महिलाओं/ बालिकाओं/छात्राओं एवं गणमान्य लोगों से संवाद स्थापित करते हुए बताया गया की विभिन्न माध्यम से जनसुनवाई में प्राप्त शिकायती प्रार्थना-पत्र एवं दैनिक अपराध आख्या से महिलाओं से संबंधित अपराधों की शिकायतें देखने को मिलती है। जहाँ एक ओर यह स्थिति महिलाओं एवं बालिकाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा को कम्प्रोमाइज करती है, वही अक्सर पारिवारिक विवाद / पारस्परिक भूमि विवाद का यथोचित समाधान नहीं दिखने पर अपराधिक घटनाओं में महिला सम्बन्धी अपराधों को जोड़ने की प्रवृत्ति भी सामाजिक रूप से देखने को मिल रही है। संक्षेप में कई अन्य प्रकरणों में ऐसी घटनायें दर्ज करा दी जाती हैं, जिनको बाद महिला एवं बालिकाओं संबन्धी अपराधों की श्रेणी में परिवर्तित कर दिया जाता है। जबकि मूलतः यह पारिवारिक और भूमिविवाद संबन्धी होती है।
दूसरी ओर, वास्तविक रूप से महिलाओं एवं बालिकाओं के विरूद्ध जो अपराध होते हैं, उनमें दुष्कर्म, शीलभंग जैसे संगीन मामलों में प्रताड़ित महिलाओं एवं बालिकाओं की मनोस्थिति काफी हद तक प्रभावित होती है और पीड़िता के जीवन में उस घटना का ट्रॉमा और भय सदैव के लिए बस जाता है। उक्त मानसिक आघात से उभरने के लिए पीड़िता को मनोवैज्ञानिक परामर्श की भी आवश्यकता होती है।
एक अन्य प्रकार का ट्रेंड जो सामने आ रहा है, उसमें नाबालिग उम्र में बालिकायें लव अफेयर, Elopement, Live in relationship जैसे सेनेरियो में फँस जाती हैं और किन्ही कारणों से उनको समझौता करना पड़ता है। कई बार बालिकायें अपनी सहमति से भी बिना सोचे समझे चली जाती है। साथ ही साथ बदनामी के भय से ऐसा संत्रास झेलना पड़ता है, जिसके कारण वह ऐसी स्थिति से निकलने में अपने आपको अक्षम महसूस करती है। परिवार में आपसी संवादहीनता और अभिभावकों से डर के कारण बालिकाए अपनी बात कह नहीं पाती है। इसके अतिरिक्त आज तकनीक के दुरूपयोग के चलते महिलाओं एवं बालिकाओं के प्रति साइबर बुलिंग के मामले भी सामने आ रहे है। इन सभी परिस्थितियों में सामाजिक जागरूकता, संवाद शिक्षा और परामर्श (counselling/support) की बेहद आवश्यकता है ताकि महिलायें एवं बालिकायें इस प्रकार के षड़यंत्रों का शिकार न बने भावनाओं में बहकर अपना जीवन बर्बाद न करें, यदि उनके साथ किसी प्रकार का अपराध घटित होता है तो वह सच बोलने की हिम्मत रख पाये और विधिक कार्यवाही के साथ-साथ उनको counseling/support और rehabilitation का मौका मिल सके।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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