न्याय एक धर्म है जिस पर सभी का समान हक है -जस्टिस जे जे मुनीर

न्याय एक धर्म है जिस पर सभी का समान हक है -जस्टिस जे जे मुनीर

वाराणसी आज दिसम्बर 2023 को गांधी अध्ययनपीठ के गांधी सभागार में समाज कार्य विभाग महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एवं इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च नई दिल्ली आई.सी.एस.एस.आर द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों के द्वारा महात्मा गांधी एवं शिवप्रसाद गुप्त के चित्रों पर माल्र्यापण तथा कुलगीत के गायन से संगोष्ठी का शुभारम्भ हुआ। इसके पश्चात् संगोष्ठी के आयोजन समिति के द्वारा उद्घाटन सत्र में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों को पुष्प गुच्छ स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम् देकर उनका स्वागत किया गया।
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो. आनंद कुमार त्यागी कुलपति महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा की गई। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि न्यायाधीश जे. जे. मुनीर इलाहाबाद हाईकोर्ट मुख्य वक्ता प्रो. नीलम सुक्रमनी विभागाध्यक्ष समाज कार्य विभाग जामिया मिल्लिया इस्लामिया नई दिल्ली संगोष्ठी के निदेशक प्रो. महेन्द्र मोहन वर्मा संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष समाज कार्य विभाग, संगोष्ठी संयोजक प्रो. अनिल कुमार चैधरी एवं संगोष्ठी सचिव प्रो. निमिषा गुप्ता एवं विश्वविद्यायल के विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, अध्यापकगण एवं प्रतिभागीगण उपस्थित रहे। अतिथियों का वाचिक स्वागत और अभिनंदन प्रो. महेन्द्र मोहन वर्मा संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष समाज कार्य विभाग द्वारा किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होने बताया कि यह संगोष्ठी न्याय की यात्रा पर केंद्रित है जो 1947 से वर्तमान तक लगातार आगे बढ़ रही है। उन्होने बताया कि संविधान अपने समस्त नागरिकों को सामाजिक अर्थिक एवं राजनैतिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है। संगोष्ठी के संयोजक प्रो. अनिल कुमार चैधरी ने विषय प्रवर्तन करते हुए संगोष्ठी की विषयवस्तु एवं प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुये माननीय कुलपति महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के द्वारा संगोष्ठी के आयोजन की सहर्ष सहमति देने और शोधार्थियों के द्वारा संगोष्ठी के प्रबंधन एवं सहयेाग देने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होने बताया कि यह संगोष्ठी आकद्मिक स्तर और शोधार्थियों के लिए न्याय के प्रति दृष्टिकोण को नये आयाम के रूप में सृजित करेगा। आपने न्याय विषय पर चर्चा करते हुए इससे संबंधित अनेक मुद्दो को प्रस्तुत किया साथ ही सामाजिक आर्थिक एवं राजनैतिक न्याय की यात्रा के सकारात्मक और नकारात्मक दोनो पहलुओं पर प्रकाश डाला। तत्पश्चात् संगोष्ठी में उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन किया। इस राष्ट्रीस संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित न्यायाधीश जे. जे. मुनीर इलाहाबाद न्यायालय ने अपने उद्बोेधन में न्याय के विभिन्न स्वरूपों पर चर्चा करते हुए न्याय को धर्म के समान बताया। तत्पश्चात् कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी द्वारा अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में वास्तविक न्याय के विषय में अपनी विचार व्यक्त करते हुये डाॅ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तुत संवैधानिक अधिकारों पर चर्चा की एवं भारत में न्याय और अधिकारों के साथ एक नई सुबह कैसे हो इस विषय पर प्रकाश डाला। उन्होने वैधानिक संस्थाओं के उन्नयन के लिये तीन महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। पहला सार्वभौमिक स्तर पर वैधानिक संस्थाओं का सर्वेक्षण दूसरा वैधानिक संस्थाओं का अनुश्रवण एवं वैधानिक संस्थाओं का प्रभावी मुल्यांकन। संगोष्ठी में प्रो. रविकान्त प्रो. बनीब्रत महंता द्वारा विशेष व्याख्यान दिया गया। यह विशेष सत्र प्रो. नन्दलाल पूर्व विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान मं. गां. काशी विद्यापीठ वाराणसी द्वारा अध्यक्षता की गई। संगोष्ठी में दो तकनीकी सत्रों का संचालन किया गया जिसमें 50 से अधिक शोध पत्रों का वाचन किया गया। संगोष्ठी का संचालन डॉ. संदीप गिरि द्वारा किया गया एवं औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रो. निमिषा गुप्ता संगोष्ठी सचिव ने किया। संगोष्ठी में आज के कार्यक्रम में विभिन्न संकायो विभागों के संकायाध्यक्ष विभागाध्यक्ष अध्यापकगण शोधार्थी प्रतिभागीगण समाज कार्य विभाग के कर्मचारीगण एवं मिडियाकर्मी उपस्थित रहें।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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