समय से बलवान कोई नहीं जो लोग समय के कारण अभिमान में है उनके लिये प्रेरणा……

सुब्रत रॉय सहारा नहीं रहे…

गोरखपुर के एक सामान्य परिवार का बेटा…..सुब्रत रॉय “सहारा श्री”, करिश्माई व्यक्ति थे और भारत के उद्योग जगत के सुपर स्टार थे, उनकी शोहरत का सूरज कभी अस्त नही होता था, बड़े बड़े नेता लाइन लगाकर खड़े रहते थे। बॉलीवुड के सुपर स्टार उनके घर चाय वितरण करते थे। उद्योग जगत नतमस्तक था सुब्रत रॉय के सामने पत्रकार उन्हें सहारा प्रणाम करके गौरवान्वित महसूस करते थे। रॉय ने जिस पर भी हाथ रख दिया वो दौलत, शोहरत और ताकत की बुलंदी पर होता था। चिट फंड से लेकर एयरलाइंस तक सब धंधा किया।लखनऊ से उनके बेटों की शादी हुई थी भारत के प्रधानमंत्री, दर्जन भर से अधिक केंद्रीय मंत्री, कितने मुख्यमंत्री, राज्यपाल और पूरा उद्योग जगत रॉय के बुलावे पर आया था। क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी मेहमानो को खाना परोसते थे। वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के सभी सदस्यों को अम्बे वैली को घर गिफ्ट में दिए। बड़े क्रिकेटर उनके बच्चों की शादी हो या घरेलू आयोजन बिना सहारा श्री के पूरा नहीं होता था। सुपर स्टार महोदय तो खाना परोसते थे। बेहिसाब दौलत और बेशुमार ताकत।
तब सिर्फ नाम ही काफी था। सुब्रत रॉय………..लेकिन फिर समय चक्र बदला सुब्रत रॉय के एंपायर को लगभग धूल में मिला दिया, जो ताकतवर लोग रॉय के घर झाड़ू पोछा करके भी गौरव की अनुभूति करते थे उन्होंने भी पीठ दिखा दी। सुब्रत रॉय का साथ उन सबने छोड़ दिया जिन पर उन्हें बहुत भरोसा था। वो घिरते गए, जेल गए, साम्राज्य सिकुड़ता गया, जैसे-तैसे जेल से निकले। कभी शान ओ शौकत का एंपायर उनके ही सामने खंडहर हो गया। किसी ने उनका साथ नहीं दिया। आज भी सेबी के पास सहारा का हजारो करोड़ है, लेकिन सहारा ग्रुप का पतन हो गया। वो जितने बड़े शो मैन थे आज उतनी ही खामोशी से चले गए। ?

अमिताभ से लेकर आडवाणी तक…… और मुलायम से लेकर ठाकरे तक सुब्रत रॉय ने अपने दोनों लड़कों की शादी में पूरे देश का वीआईपी इकट्ठा किया था …

2004 में पाँच सौ करोड़ की ये शादी सबसे महँगी मानी गयी थी…….

और आज क़रीब दो दिन इंतज़ार करने के बाद उनकी चिता में पौत्र ने मुखाग्नि दी? विदेश में बैठे दोनों बेटों ने पिता की मृत्यु पर पहुँचने में असमर्थता जता दी ??

यही दुनिया है । सब यही का एकत्रित किया कचरा यही फेक जाना है ??
सर, इसीलिए कहता हूं, अपनों से प्रेम करो उनका अपमान मत करो, समय से न लड़ो क्यूंकि समय पलटेगा और समय से आजतक कोई जीत नही पाया और जीत भी नही सकता।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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