वीरपाल खेल मेला आज से

आज की बात
वीरपाल खेल मेला आज से
, शंकर देव

आज से तीन दिन बाह में खेल मेला लगने जा रहा है ।यह मेला साठ के दशक से अलग अलग रूप से लगता आया है । कभी कोई प्रिंसिपल चारों के लिए खेल का सामान ट्रक भरकर ला शिक्षक के हवाले कर देता था यहां तो वो शिक्षक गांव गांव जाकर खोजता था कि कौन सा बालक गोला, जेवलिन, डिस्कस फेंक भी रहा है कि नहीं । वालीबाल तो एक एक गांव में दो दो तक पन्हुंच गई जिससे बाह तहसील के कई गांवों से वालीबाल की प्रतिभाएं अपार मिली । जिनमें कई ने तो देश तो कई अंतराष्ट्रीय स्तर तक खेले । एथलेटिक्स में तो कमल हो गया । एक नहीं दो अर्जुन अवार्ड तक मिले । हमारी पीढ़ी से पहले और बाद की पीढ़ी से थे विजय सिंह चौहान, और अजित भदौरिया । रतन सिंह भदौरिया का नाम भी ऐसा नाम जो तहसील के खेल माहोल से प्रेरित सेना में भर्ती होने के बाद खिलाड़ी बना। जिसने एशिया स्तर तक परचम फहराया ।
ऐसे खेल माहोल के जनक वीरपाल मास्टर साहब थे जो अपना तन मन धन प्रतिभा को उसको उचित आयाम तक पहुंचाने में लगाते थे ।भाई जुगराज सिंह भदौरिया , विजय सिंह चौहान, रामसेवक शर्मा, विजय वर्मा, अजित भदौरिया अजय भदौरिया , मनोज गुप्ता, प्रदीप शर्मा जेसे सैकड़ों खिलाड़ियों के मुख से बहुत कुछ हम सुनते आए हैं उनके और मास्टर वीर पाल सिंह जी के साथ के संस्मरण ।
श्री वीरपाल सिंह जी केवल खिलाड़ी ही नहीं वे साधारण व्यक्तित्व के भी धनी थे । खेल के प्रति समर्पित व्यक्ति अपने गांव रुदमुली की भी फिक्र रखते थे । जो गांव के लोग सेना में थे उनके बच्चों की शिक्षा और खेल दोनो के प्रति क्या नैतिक जिम्मेदारी है को जगाए रखने का काम किया करते थे ।
इसके अलावा नई पीढ़ी को देश सेवा में समर्पण भी रहे के लिए होमगार्ड युवक मंगल दल जेसे युवा कार्य क्रम भी उनकी सहभागिता के हिस्से थे ।
मेरे पिताजी उनके बारे में बताते थे वीरपाल की वजह से ही भदवार स्कूल का नाम खेल के माध्यम से देश विदेश में जान सके हैं । इसलिए उनके किसी भी कार्य क्रम को योजना बनाके लागू करने वे खुशी महसूस करते थे । वीरपाल माड़ साहब रंजीत जैसी प्रतिभाओं को भी खेल में चमकवा सके ।
उनके तीन पुत्रों में सबसे बड़े पुत्र प्रमेंद्र प्रताप वालीबाल के राष्ट्र स्तर के खिलाड़ी रहे । दूसरे उनके युवा अभियान को आगे बढ़ाए हुए हैं तो तीसरे मेडिकल क्षेत्र में व्यवसाय कर रहे हैं ।
आज तीन नवंबर से पांच तक वालीबाल होगी । माड़ साहब वीर पाल सिंह भदौरिया स्मृति में प्रतियोगिता में उन्हें श्रद्धांजलि देने वाले भी जुड़ेंगे । हम पुराने दोस्त खिलाड़ियों के अलावा भूली भली जिंदगी से नए रंग में मिलेंगे ।
आओ नमन करें एसे गुरु को जो द्रोण कम सभी के साथ एक एक लव्य बन कर ज्यादा रहे ।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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