नाम मेडिकल कॉलेज, सुविधाएं स्वास्थ्य केंद्र वाली भी नहीं



एटा। लोगों को न तो आंख में डालने को ड्राप मिल रही और न ही न ही कफ सीरफ। जो दवाएं मिल भी रही है उसके लिए भी मारा मारी हो रही है। डॉक्टर के पर्चे की लिखी दवा भी पूरी ना मिलने से मरीज परेशान है।

रविवार के अवकाश के बाद सोमवार को जब अस्पताल खुला तो मरीजों की लंबी लाइन थी। पर्चा बनवाने के लिए लाइन लगी। पर्चा की लाइन से निकलते तो डॉक्टर को दिखाने के लिए भीड़ थी। सबसे अधिक मरीज वायरल बुखार के है। यह जो बुखार है जो एक-एक सप्ताह से पहले जाने का नाम नहीं ले रहा है।

जांच कराने के लिए भी सबसे अधिक भीड़ है। सोमवार को मलेरिया, डेंगू के लिए 60 सैंपल लिए गए। इसमें सभी की रिपोर्ट नैगेटिव आई। सबसे अधिक परेशानी तो दवा लेने के लिए महिलाओं को उठानी पड़ी। बच्चों के साथ आने वाले महिलाओं को पूरी दवा नहीं मिल रही। आयरन की गोलियां भी वहां पर नहीं है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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